ब्रिटिशों ने भी ऐसे ज़मीन नहीं छीनी थी : दयामनी बारला

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अंग्रेजों के आदिवासियों के लिए ज़मीन सुरक्षित रखने के लिय बनाये गए कानून में राज्य की भाजपा सरकार द्वारा बदले जाने को लेकर हुआ धरना| समाजकर्मी दयामनी बारला ने कहा की “आदिवासियों ने अपनी ज़मीन क लिए अंग्रेजों से लड़ाई की थी| स्वतंत्रता संग्राम में भी झारखण्ड के आदिवासियों ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया था|” अंग्रेजों ने 1908 में आदिवासियों की भाषा और संस्कृति की रक्षा के लिए छोटानागपुर भू-स्वामित्व क़ानून बनाया|”

आपको बात दें कि  आदिवासी इलाके की ज़मीन सिर्फ माइनिंग और इण्डस्ट्री बनाने के लिए जा सकता है| विकास के नाम पर जंगलों की बुरी तरह से कटाई की जा रही है| जिससे आदिवासी समाज पर संकट के बदल मंडराने है और उनकी संस्कृति के खत्म होने का खतरा दिखाई देने लगा है|  समाजकर्मी दयामनी बारला ने कहा की “झारखण्ड सरकार ने कार्पोरेट घरानों को आदिवासियों की ज़मीन छीनकर देने के लिय कानून के सेक्शन 21 को बदल दिया जिसमे कहा गया है की कृषि के ज़मीन या ग्रीन लैंड का नेचर नहीं बदला जा सकता लेकिन सरकार ने कृषि ज़मीन बड़े बड़े कार्पोरेट घरानों देने के लिए  क्रषि जमीन के नेचर को ही बदल दिया|” उन्होंने कहा कि ” सरकार राज्य के विकास ने नाम पर आदिवासिओं की ज़मीन को माइनिंग के लिए दे रही है और उनकी ज़मीन पर बड़े बड़े डैम बनाये जा रहे हैं|”उन्होंने कहा कि “जब भी आदिवासी धरना करते है  तो सरकार धारा 144 लगा देती है और आदिवासियों पर गोलियां चलाई जाती है|” उन्होंने आगे कहा कि “जिस तरह  का अत्याचार राज्य सरकार कर  रही है ,इस तरह क आत्याचार तो अंग्रेजों ने भी आदिवासियों पर नहीं किया था |”

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