सत्ता विरोधी केजरीवाल कैसे बन गए सत्ताधीश ?

Arving Kejriwal CM Office

सत्ता वो शय है, जो कई बार आपको खुद की खबर भी नहीं लगने देती| ऐसा ही कुछ अरविंद केजरीवाल के साथ भी हुआ| लेकिन सवाल ये है कि जिस सत्ताई एलिटिजम के खिलाफ आप खड़े हुए, खुद उसी में कैसे फंस गए? फंस गए इसलिए, क्योंकि जाहिर तौर पर सुंदर नगरी के उन लोगों को एप्वायंटमेंट न देने के पीछे कुछ ऐसे लोगों की संलिप्तता रही होगी, जो ये तय करने में खुद इतने सक्षम हैं कि अरविंद केजरीवाल को किससे मिलना है और किससे नहीं मिलना है| सत्ता…

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आखिर क्यूँ सभ्य और वैज्ञानिक नहीं बन पा रहा है भारतीय समाज ?

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गौरवपूर्ण अतीत और बहुसंस्कृति की खूबियों के बावजूद भारतीय समाज स्वाभाविक रूप से वैज्ञानिक और प्रगतिशील कम दिखता है| वैज्ञानिक सोच पर आधारित सभ्य समाज बनने में भारत की चुनौतियों की पड़ताल कर रहे हैं संजय जोठे | जो लोग वास्तव में इस देश की परम्पराओं और इतिहास पर गर्व करते हैं या करना चाहते हैं उन्हें भारतीय दर्शन के भौतिवाद का अध्ययन करना चाहिए। इस अध्ययन के बाद आप वास्तव में गर्व कर पाएंगे कि भारत में भी सच्चे अर्थों में भौतिकवादियों, श्रमजीवी समाजों, जनजातीय समाजों और स्त्रीयों ने…

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संसद में लोकतंत्र की मॉब लिंचिंग

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मायावती की आवाज हमारे समाज के सबसे “शोषित तबके की आवाज है और इस आवाज को संसद के बाहर प्रशासन द्वारा और संसद के भीतर भगवा ब्रिगेड की भीड़ द्वारा दबा दिये जाना एक मायने में वंचितों समाज के सवालों की भीड़ हत्या (मॉब लिंचिग) के समान है : महेश राठी    सहारनपुर काण्ड़ और उ.प्र. में दलितों पर भगवा ब्रिगेड के बढ़ते हमलों पर मायावती की आवाज को हुडदंगी तरीके से दबा दिये जाना और उसके विरोध में बसपा प्रमुख सुश्री मायावती का इस्तीफा देना भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का काला…

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कुछ सुलझी, कुछ अनसुलझी रह जाती है रिश्तों की कहानी

Rachna Ji Article

प्राय: कोई भी नया संबंध जुड़ने की आरम्भिक अवस्था बहुत रोचक व आकर्षक होता है। धीरे-धीरे यह रोचकता अपने चरम पर पहुँचने के बाद ठिठक जाती है। उसे आगे बढ़ने का स्थान नहीं मिल पाता। शीर्ष के आगे और पीछे, दोनों ओर ढलान होती है। अत: शीर्ष बिंदु पर टिके -टिके रोचकता जब थकान और उकताहट महसूस करने लगती है, वह उदास मन से कदम आगे बढ़ाती है। मानवीय संबंधों के उतार-चढाव को एक अलग नजरिये से देख रहीं हैं रचना त्यागी| हज़ारों की भीड़ में भी हर व्यक्ति अपनी…

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मोदीराज में भारत के शिक्षण संस्थानों का तेजी से हुआ भगवाकरण

Anti Student Narendra Modi

मोदीराज में बहुत आक्रामक रूप से भारत के शिक्षण संस्थानों का संघीकरण किया जा रहा है| बेतहाशा फीस वृद्धि, शिक्षा बजट में लगातार कटौती,  शिक्षण संस्थानों पर संघी एजेंडे को लागू करने के लिए किए जा रहे लगातार हमले, छात्र विरोधी सरकारी नीतियाँ, पाठ्यक्रम में आक्रामकता के साथ बदलाव, तेजी से शिक्षण संस्थानों को दक्षिणपंथी ताकतों के कब्जे में दिया जाना, यह सब केंद्र सरकार ने इतनी रफ़्तार में किया कि इसका भगवा एजेंडा कोई पर्दे की बात नहीं रह गयी| केंद्र सरकार द्वारा सांप्रदायिक राष्ट्रवाद, कॉर्पोरेट गठजोड और अन्तराष्ट्रीय पूंजी के प्रत्यक्ष दबाव…

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आसान नहीं है बद्री नारायण लाल हो जाना

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बिहार कम्युनिष्ट पार्टी के इतिहास में 21 मई 2017 कभी नहीं भुल पाने वाली वह तारीख है, जब साम्यवादी आन्दोलन का एक चमचमाता लाल सितारा अपने साथियों को हमेशा के लिए अलविदा कह गया| गत 31 मई को पटना के आईएमए सभागार में भारतीय कम्युनिष्ट पार्टी ने दिवंगत कॉमरेड बद्री नारायण लाल की स्मृति में सर्वदलीय श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया| श्रद्धांजलि सभा में बद्री बाबू की जीवनी और उनके योगदानों पर विस्तार से बातें हुई| तमाम वक्ताओं ने उनसे जुड़े संस्मरण साझा किए| अपनी सरलता और सहजता से किसी…

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