उत्तर प्रदेश में चुनाव का बहिष्कार, मतदान के पहले चार घंटे में पड़े 3 वोट

VOTERSउत्तर प्रदेश में जहाँ इस बार पहले चरण के चुनाव में रिकार्ड मतदान पड़ा वहीँ एक जगह ऐसी भी थी जहाँ पर विधानसभा चुनाव का बहिष्कार हो रहा था| आगरा के पांच गांवों के किसान 11 फ़रवरी की सुबह मतदान केंद्र तक तो आए लेकिन मतदाता केंद्र के अंदर नहीं गए। जमीन के लंबित मुआवजे को लेकर किसानों में इस कदर एका थी कि इस क्षेत्र में पहले चार घंटों में तीन वोट पड़े। ये वोट भी आंगनवाड़ी में काम करने वाली कार्यकर्ताओं के थे।

मतदान के बहिष्कार की खबर मिलने के बाद प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी गांव पहुंचे। उन्होंने गांव वालों से बातचीत की। उनके अड़े रुख को देखकर उन्होंने कुछ प्रबुद्ध लोगों की मदद ली। फिर इन सभी के समझाने और एसडीएम के आश्वासन के बाद ग्रामीण मतदान के लिए तैयार हुए।

नगला देवरी, नगला सुजगई, हरतन्ना की गढ़ी, इस्लाम, लोहिया आदि पांच गांवों में सुबह तो चुनावी रंग में हुई लेकिन कुछ ही देर में इसका रंग गायब हो गया। मतदाता मतदान केंद्र तक गए। कई मतदान केंद्र के बाहर घूम रहे थे और मतदान अधिकारी मतदान केंद्र के अंदर उनकी बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। यह खबर कुछ देर बाद वरिष्ठ अधिकारियों को दी गई।

अधिकारियों को बताया गया कि “आगरा के इन पांच गांवों के किसानों को जमीन के अधिग्रहण का उचित मुआवजा नहीं मिला। यह जमीन एनटीपीसी को दी गई थी।” देवरी के किसान रामभरोसी ने कहा कि “जमीन के उचित मुआवजे के लिए कई अधिकारियों के दरवाजे खटखटाए गए। हमें हमारी जमीन का उचित मुआवजा तक नहीं मिला। क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों ने बीते 10 सालों में कोई विकास कार्य नहीं करवाया है।” हरतन्ना की गढ़ी के किसान भोजराज ने कहा कि “प्रशासन की वादाखिलाफी के कारण हमें मतदान नहीं करने के लिए बाध्य होना पड़ा। भारतीय किसान यूनियन के आगरा अध्यक्ष श्याम सिंह चाहर ने कहा कि किसानों ने जमीन के उचित मुआवजे की वादाखिलाफी पर सुबह चुनाव का बहिष्कार शुरू किया।”

इसकी सूचना मिलने पर एसडीएम सदर और तहसीलदार मौके पर पहुंचे परंतु किसान मत नहीं डालने पर अड़े रहे। इसके बाद एडीएम सिटी रिटर्निंग अफसर के साथ मतदान केंद्र पर पहुंचे और उन्होंने संबधित बीएलओ को प्रबुद्ध लोगों के साथ सभी गांवों में भेजा|मतदाताओं को वोट डालने के लिए घरों से बुलाया गया। प्रबुद्ध लोगों के समझाने और वरिष्ठ अधिकारियों के आश्वासन पर मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने के लिए राजी हुए।

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इसकी पुष्टि करते हुए गांव नगला देवरी के प्रधान रनवीर सिंह ने बताया कि वरिष्ठ अधिकारियों ने चुनाव के बाद ग्रामीणों की समस्याएं हल करने का आश्वासन दिया है। गांव के कई ग्रामीणों का कहना है कि “यदि प्रशासन व अधिकारियों ने फिर से वादाखिलाफी की है तो आगे की रणनीति तय करेंगे।” एसडीएम सदर ने कहा कि “हमें चुनाव बहिष्कार की सूचना मिली थी लेकिन ऐसा कुछ नहीं है। यह अफवाहें हैं, मतदाता निर्भीक होकर मतदान कर रहे हैं।” लोकतंत्र के पर्व चुनाव लोगों के मत डालने के साथ ही अपनी रंगत में आ गया। कुछ ही देर में हर बार की तरह मतदान शुरू हो गया।

बहिष्कार की वजह

आगरा के नगला देवरी के पांच गांवों में 10 हजार की आबादी है। एनटीपीसी के लिए किसानों की जमीन का अधिग्रहण हुआ। लेकिन किसानों को उचित मुआवजा नहीं मिला। किसान मुआवजे के लिए लंबे समय से दर दर की ठोकरें खा रहे थे।

ऐसे निपटा मामला

वरिष्ठ अधिकारियों के आश्वासन और प्रबुद्ध लोगों के समझाने पर ग्रामीणों ने मताधिकार का उपयोग शुरू किया। अधिकारियों के अनुसार चुनाव बाद यह मसला सुलझाया जाएगा। ग्रामीणों के अनुसार अगर चुनाव बाद मामला नहीं सुलझा तो आगे की रणनीति तय करेंगे।

लेखन / प्रस्तुति :

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