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पाक पीएम नवाज शरीफ ने एनएसजी में भारत की सदस्‍यता का विरोध करने के लिए करीब 17 देशों के पीएम को पत्र लिखा था। इसका खुलासा खुद सरताज अजीज ने किया है।

इस्लामाबाद। भारत के न्यूक्लियर सप्लाई ग्रुप (एनएसजी) का सदस्य न बनने से खुश पाकिस्तान ने आज एक बड़ा खुलासा किया है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अजीज का कहना है कि भारत एनएसजी का हिस्सा न बन सके, इसके लिए पाकिस्तान ब्यूरोक्रेट्स ने काफी काम किया। पाकिस्तान के अखबार ‘द डॉन’ की खबर के मुताबिक एक बातचीत में उन्होंने कहा कि भारत को एनएसजी का सदस्य बनाने से रोकने के लिए खुद पाक प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने एनएसजी के करीब 17 सदस्यों को पत्र लिखा था। इस पत्र में शरीफ ने सदस्य देशों से भारत की सदस्यता का समर्थन न करने की अपील की थी।

गौरतलब है कि सरताज अजीज का यह बयान एनएसजी की बैठक से करीब चार दिन बाद आया है। सियोल में भारत की एनएसजी में सदस्यता को लेकर चली बैठक में चीन समेत करीब छह देशों ने भारत की सदस्यता का विरोध किया था। चीन का कहना था कि भारत ने एनपीटी पर साइन नहीं किए हैं लिहाजा उसको इसका सदस्य नहीं बनाया जा सकता है। उसका यह भी कहना था कि भारत के लिए नियमाें को बदला नहीं जा सकता है।

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एनएसजी की सदस्यता को लेकर अमेरिका ने सभी सदस्य देशों से भारत का समर्थन करने की खुली अपील भी की थी। लेकिन यह अपील काम नहीं आई और भारत एनएसजी का सदस्य नहीं बन सका। हालांकि इसके लिए भारत के दरवाजे अभी बंद नहीं हुए हैं। एक वर्ष के अंदर इस विषय पर दोबारा चर्चा हो सकती है। इस मुद्दे पर चीन का कहना था कि यदि भारत को इसमें छूट दी जा सकती है तो पाकिस्तान को भी छूट दी जानी चाहिए। वहीं चीन के इस बयान पर भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का कहना था कि भारत को पाकिस्तान के एनएसजी का सदस्य बनाए जाने पर कोई आपत्ति नहीं है।

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हालांकि एनएसजी पर मिली हार के बाद विपक्षी पार्टियों विशेषकर कांग्रेस ने इसके लिए भाजपा सरकार की कड़ी आलोचना भी की थी। उसका कहना था कि इस विषय पर सरकार ने बेवजह की मशक्कत कर देश केे सम्मान को ठेस पहुंचाई हैै। वहीं प्रख्यात वैज्ञानिक श्रीनिवासन ने भी इस मुद्दे पर सरकार की कोशिशों को गैरजरूरी बताया था।

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