Print Friendly, PDF & Email

book-fair-hind-watch

महिलाओं के लेखन की समृद्ध परंपरा का गरिमापूर्ण प्रदर्शन 

  • महिला लेखिकाओं द्वारा और महिला मुद्दों पर लिखी 600 से ज्यादा पुस्तकों का प्रदर्शन
  • मानुषी थीम पर विशेष रूप से मेले में आकर्षक थीम पैवेलियन का निर्माण किया गया है
  • बड़ी संख्या में महिला रचनाकार भी पुस्तक मेले में शामिल
  • नेक साहित्यिक एवं अन्य आयोजनों में लेखिकाओं का उद्बोधन
  • लेखिकाओं, कवयित्रियों, महिला कथाकारों, पत्रकारों एवं स्त्री अधिकार कार्यकर्ताओं से मिलने का बेहतरीन मौका

नई दिल्ली विश्व पुस्तकmanushi-theme-at-new-delhi-world-book-fair-2017 मेला-2017 महिलाओं द्वारा और महिला विषयों पर लेखन पर केन्द्रितमानुषी थीम पर आयोजित किया जा रहा है| मानुषी थीम के लिए एक विशेष रूप से मेले में आकर्षक थीम पैवेलियन का निर्माण किया गया है| इस थीम पैवेलियन में महिला लेखिकाओं द्वारा और महिला मुद्दों पर लिखी 600 से ज्यादा पुस्तकों का प्रदर्शन किया गया है। इसमें प्राचीन काल से अब तक महिलाओं के लेखन की समृद्ध परंपरा को प्रदर्शित भी किया जायेगा| बड़ी संख्या में महिला रचनाकार भी पुस्तक मेले में शामिल हो रहीं हैं| अनेक साहित्यिक एवं अन्य आयोजनों में लेखिकाओं का उद्बोधन भी सुना जा सकता है| पुस्तक मेले में आने वालों को लेखिकाओं, कवयित्रियों, महिला कथाकारों, पत्रकारों एवं स्त्री अधिकार कार्यकर्ताओं से मिलने का बेहतरीन मौका भी मिलेगा|

नई दिल्ली के प्रगति मैदान में नेशनल बुक ट्रस्ट (एनबीटी) द्वारा भारत व्यापार संवर्धन संगठन (आईटीपीओ) के सहयोग से नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2017 का आयोजन 7 से 15 जनवरी 2017 तक आयोजित किया जा रहा है| एनबीटी के अध्यक्ष बल्देव भाई शर्मा ने पुस्तक मेले के शुभारम्भ समारोह में कहा कि वैदिक काल से ही विदुषियों की एक समृद्ध और सुदीर्घ परंपरा रही है। इसी परंपरा को पुस्तक मेले में मानुषी विषय के अंतर्गत प्रदर्शित किया गया है।”  उन्होंने बताया कि “स्त्रियों के प्रेरणात्मक जीवन को प्रस्तुत करने के लिय नारी अग्रदूत नाम से पुस्तक माला प्रदर्शित की गई है|”

गत 7  जनवरी को मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री महेन्द्र नाथ पांडे ने पुस्तक मेले का उद्घाटन किया। उन्होंने पुस्तक मेले का विषय मानुषी यानी महिला लेखन रखे जाने की सराहना की। डॉ. महेन्द्र नाथ पांडे ने कहा किजहाँ पुस्तकें ज्ञान का माध्यम हैं  वही तनाव, दुख और परेशानियों जैसे सभी क्षणों में शांति प्रदान करने का बहुत बड़ा सहारा है पुस्तकें| पुस्तकों के महत्त्व को कभी कम नहीं आँका जा सकता|” महिलाओं पर हो रहे अत्याचारों पर क्षोभ व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि साहित्य उनके प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने में मदद कर सकता है।”

इस मौके पर ज्ञानपीठ पुरस्कार प्राप्त वरिष्ठ ओड़िया लेखिका प्रतिभा राय ने कहा किपुरुष और नारी लेखन को अलग-अलग नहीं देखा जाना चाहिए।”  उन्होंने आगे कहा कि सभी लेखकों में मानवतावाद विद्यमान होता है चाहे वह स्त्री हो या पुरुष|” उन्होंने महिला लेखन पर बोलते हुए कहा कि महिला  लेखन  अत्यंत समृद्ध है एव इसका अपन लग अस्तित्व है|” 

पुस्तक मेले की अन्य ख़बरें >>