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नई दिल्ली
भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में सामाजिक कार्यकर्ता सुधा भारद्वाज से पूछताछ के लिए पुणे पुलिस फ़रीदाबाद पहुंच चुकी है। उन्हें आज किसी भी समय हिरासत में लिया जा सकता है। महाराष्ट्र पुलिस ने उन्हें जिला अदालत में पेश कर पुणे ले जाने के लिए ट्रांजिट रिमांड की मांग की थी, मगर उनके वकीलों द्वारा हाईकोर्ट में लगाई याचिका पर सुधा को घर में ही नजरबंद किया गया है।

वहीं, बताया जा रहा है कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटिशन दाखिल की गई है। ऐसे में पुलिस उसी पर फ़ैसले का इंतज़ार कर रही है। इसके बाद ही पुलिस गिरफ़्तारी करने या नहीं करने पर फ़ैसला लेगी।

पुणे पुलिस ने 28 अगस्त को सुधा, फरेरा और गोंजाल्विस के साथ हैदराबाद से वरवर राव एवं दिल्ली से गौतम नवलखा को गिरफ्तार किया था। बाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर इन्हें उनके घरों में नजरबंद कर दिया गया था। सुधा, अरुण और वर्नन की नजरबंदी 26 अक्टूबर को खत्म हो रही है, इसलिए इन्होंने जमानत याचिका दायर की थी।

पुणे की एक स्थानीय अदालत की ओर से शुक्रवार को एल्गार परिषद सम्मेलन मामले में वामपंथी ऐक्टिविस्ट अरुण फेरेरा और वर्नोन गॉनजैल्विस की जमानत याचिका खारिज करने के कुछ ही घंटों बाद महाराष्ट्र पुलिस ने दोनों को हिरासत में ले लिया है। इन दोनों एक्टिविस्टों पर माओवादियों से संबंध रखने का आरोप है। पुलिस के अनुसार दोनों एक्टिविस्टों को आज अदालत के सामने पेश किया जाएगा।

आपको बता दें कि इससे पहले शुक्रवार को जिला और सत्र न्यायाधीश (विशेष न्यायाधीश) के डी वडाणे ने गॉनजैल्विस और फेरेरा सहित सुधा भारद्वाज की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। वडाणे ने टिप्पणी करते हुए कहा कि पुलिस की ओर से एकत्र सामग्री से प्रतीत होता है कि आरोपियों के माओवादियों से कथित संबंध हैं।