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डीमा हसाओ, असम
ह ख़बर उन सब के लिए है जो सोशल मीडिया या वाट्सऐप बहुत सक्रिय रहते हैं। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि नकली मैसेज वायरल होने से कैसे लोगों एक दुसरे के खून के प्यासे हो जाते हैं। आजकल वाट्सऐप और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर आपके घर के आस-पास बच्चा चोरों के घुमने का मैसेज वायरल किया जा रहा है।

महाराष्ट्र के धुले जिले में ग्रामीणों ने बच्चा चोरी करने वाले गिरोह का सदस्य होने के संदेह में पांच लोगों की पीट-पीटकर हत्या कर दी। इसी तरह गुजरात के अहमदाबाद भीड़ ने एक 40 वर्षीय महिला की पीट-पीटकर इसलिए हत्या कर दी क्यूंकि उन्हें शक था कि यह स्त्री बच्चा चोर है।

ऐसा ही मामला सूरत का भी है जहां बच्चा चोरी के आरोप में 43 साल की उम्र में मां बनी महिला को अपनी ही बेटी का चोर बताकर भीड़ द्वारा पीटना शुरू कर दिया। इसी तरह त्रिपुरा में हाल ही में एक फेक न्यूज की वजह से हुई हिंसा 4 लोगों की जान चली गई है।

ताजा मामला
असम के डीमा हसाओ इलाके 3 साधुओं को हिंसक भीड़ ने बच्चा चोर होने संदेह में धर दबोचा और उनके साथ मार-पीट करने लगी। वहन मौजूद आर्मी के जवानों ने तुरंत एक्शन लेते हुए तीनों साधुओं को बेकाबू भीड़ से बचाया। इन तीन साधुओं में से दो उत्तर प्रदेश से हैं जबकि एक गुजरात से है. स्थानीय लोगों ने इन तीनों लोगों को घेर लिया था अगर सेना के जवान दखल न देते तो बाकी और राज्यों में अफ़वाह के चलते जिस तरह हिंसक भीड़ हत्याएं कर रही हैं ऐसा ही कुछ यहां भी हो सकता था। ये घटना असम के डीमा हसाओ इलाके की है। इन लोगों को बाद में सेना के महुर कैंप ले जाया गया जहां इनसे पूछताछ भी की गई। सेना के अधिकारियों की माने तो ये लोग असम में होने वाले मेले में भाग लेने के लिए यहां आए थे।

अफवाहों को फैलाने में सहयोगी न बनें
अगर आपको भी ऐसा कोई मैसेज मिलता हो तो हो जाईये सावधान। ये फेक न्यूज या फर्जी ख़बर हो सकता है। ऐसे किसी मैसेज के बहकावे में आकर आप किसी अजनबी को संदिग्ध निगाहों से देखने या उनपर हमला करने की भूल मत कीजियेगा। ऐसे किसी भी ख़बर या मैसेज की सत्यता की पुष्टि हो जाने तक आपको ऐसे संदेश को फॉरवर्ड करने से भी बचना चाहिए। आपको यह ध्यान रखना होगा कि अनजाने में आप कहीं किसी अफवाह को हवा तो नहीं दे रहे हैं क्यूंकि हर अजनबी व्यक्ति संदिग्ध नहीं होता है।

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