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अक्सर रोग स्वभाव से जानलेवा नहीं होते बल्कि उनको लेकर बरती गई लापरवाही ही इसे जानलेवा बनाती है। यह बात पुरुषों के बजाए महिलाओं पर ज्यादा लागू होती गई। क्योंकि इन्हें अपने मर्ज को बताने में आज भी शर्म आती है।

ऐसा इसलिये कहा जा रहा है क्योंकि सेंट्रल हेल्थ मिनिस्ट्री के अनुसार, 2017 तक आर्थराइटिस की चपेट में आने वाली महिलाओं की संख्या दोगुना हो गई है।

वहीं, 2019 तक आर्थराइटिस से पीड़ित लोगों की संख्या डायबीटीज के पेशेंट्स से भी ज्यादा हो जाएगी।

डॉक्टरों की मानें तो आर्थराइटिस 230 तरह की होती है लेकिन इसका रूप कोई भी हो, सबसे पहले जॉइंट्स में सूजन आ जाती है।

भारत में हर 3 में एक महिला आर्थराइट्सि से पीड़ित है। हाल ही में की गई एक रिसर्च के अनुसार, देश में 55 वर्ष से अधिक उम्र के 20 प्रतिशत, 65 वर्ष से अधिक उम्र के 40 प्रतिशत और 80 वर्ष से अधिक उम्र के 60 प्रतिशत लोगों को जोड़ों या घुटनों में दर्द की समस्या आम बात हो गई है।

आंकड़ों के मुताबिक, 15 फीसदी यूथ भी इन दिनों इस बीमारी की चपेट में हैं। हालांकि यूथ में यह ज्यादातर किसी ऐक्सीडेंट या जॉइंट्स पेन से उभरती है।

अगर सही इलाज न हो, तो ट्रॉमा ऑर्थराइटिस बन जाती है। इसकी वजह से चलने में, सीढ़ियां चढ़ने व उतरने में भी काफी दिक्कत होती है। इसका सलूशन केवल एक्सर्साइज ही होता है।

अग़र आप भी इन गलतियों को दोहरा रहे हैं तो सावधान हो जाइए क्योंकि हर मर्ज शुरुआत में हल्का लगता है बाद में जानलेवा होते देर नहीं लगती।