Print Friendly, PDF & Email

गुवाहाटी (नेशनल डेस्क)।
असमिया गायक-संगीतकार भूपेन हजारिका को भारत रत्न देने की घोषणा करके केंद्र सरकार ने पूर्वोत्तर के लोगों का समर्थन हासिल करने का इरादा बनाया था लेकिन हजारिका के बेटे ने सरकार के इस पेशकश को अस्वीकार कर दिया है। तेज हजारिका ने कहा है कि अभी तक सरकार की तरफ से न्योता नहीं मिला है। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि अमेरिका में रह रहे तेज हजारिका ने असम के एक न्यूज चैनल पर कहा कि राज्य के हालात के मद्देनजर वह पिता को मरणोपरांत दिया जा रहा भारत रत्न नहीं लेंगे। वहीं दूसरी ओर भूपेन हजारिका के भाई समर हजारिका का कहना है कि भारत रत्न सम्मान को लेकर चल रहा कोई भी विवाद पूरी तरह से गैरजरूरी है। इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी कहा कि भूपेन हजारिका के बेटे तेज ने अपने एफबी पोस्ट में भारत रत्न सम्मान लौटाने जैसी कोई बात नहीं की।

‘नागरिकता संशोधन विधेयक भूपेन की सोच के उलट’
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक फेसबुक पोस्ट पर तेज ने लिखा – “कई पत्रकार मुझसे पूछ रहे हैं कि पिता को दिया जाने वाला भारत रत्न सम्मान स्वीकार करूंगा या नहीं। इस पर मैं दो बातें कहना चाहता हूं। एक- जब मुझे निमंत्रण ही नहीं मिला तो उसे अस्वीकार करने का प्रश्न ही नहीं है। दूसरा- सरकार ने जिस तरह सम्मान देने का फैसला किया और देशभर में इसे अहमियत मिली। इसे सस्ती लोकप्रियता हासिल करने का जरिया कहा जा सकता है।”

ख़बरों में तेज हजारिका के हवाले से यह भी कहा गया था के “उनके प्रशंसकों में पूर्वोत्तर के लोगों का एक बड़ा हिस्सा है। उन्होंने (भूपेन हजारिका) भारत की महान विविधता को विखंडित करने का प्रयास नहीं किया। सरकार ने जो विधेयक पेश किया है वह भूपेन की इच्छा के खिलाफ है। यह एक तरह से असंवैधानिक और गैर-भारतीय लगता है।”

भूपेन के बेटे ने कहा कि बिल किसी भी रूप में इस वक्त या भविष्य में दुखद होगा। इससे न केवल लोगों का जीवन, उनकी भाषा, पहचान और क्षेत्र में सत्ता का संतुलन प्रभावित होगा बल्कि इससे मेरे पिता की स्थिति भी कमतर होगी। एक लोकतांत्रिक गणराज्य में सांप्रदायिक सद्भाव और अखंडता को झटका लगेगा।

2014 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार थे भूपेन हजारिका 
असम के प्रसिद्ध गायक भूपेन हजारिका भी बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं। वे 2004 के लोकसभा चुनाव में  बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़े थे। कांग्रेस ने इस चुनाव में जीत हासिल की थी। इस चुनाव में हजारिका 2,92,022 वोट पाकर दूसरे स्थान पर थे।

क्या है नागरिकता संशोधन विधेयक?
इस विधेयक के जरिए 1955 के कानून को संशोधित किया जाएगा। इससे अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के गैर मुस्लिमों (हिंदु, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी व इसाई) को भारत की नागरिकता देने में आसानी होगी। मौजूदा कानून के अनुसार इन लोगों को 12 साल बाद भारत की नागरिकता मिल सकती है, लेकिन बिल पास हो जाने के बाद यह समयावधि 6 साल हो जाएगी।

वैध दस्तावेज न होने पर भी 3 देशों के गैर मुस्लिमों को इसका लाभ मिलेगा। गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने लोकसभा में कहा था कि यह विधेयक केवल असम तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह पूरे देश में प्रभावी रहेगा। पश्चिमी सीमा से गुजरात, राजस्थान, दिल्ली, मध्य प्रदेश और अन्य राज्यों में आने वाले पीड़ित प्रवासियों को इससे राहत मिलेगी।

भाजपा के सहयोगी कर रहे विरोध
भाजपा की असम में सहयोगी गठबंधन पार्टी असम गण परिषद बिल को स्वदेशी समुदाय के लोगों के सांस्कृतिक और भाषाई पहचान के खिलाफ बता रही है। असम गण परिषद के अलावा कृषक मुक्ति संग्राम समिति और ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (AASU) भी इसके विरोध में हैं। इसके अलावा कांग्रेस और ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट ने भी इसका विरोध किया है।