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मुख्य सचिव विवाद अब एक सियासी साजिश बनकर सामने आ रहा है। कथित मारपीट की बात इतना बड़ा विवाद बन चुकी है कि अफसर सरकार के खिलाफ हड़ताल जैसे हालात पैदा करने लगे हैं।

मुख्यमंत्री समेत तमाम मंत्रियों का बायकॉट करने पर उतारू ये अफसर अरविंद केजरीवाल से माफी की मांग पर अड़े है। लेकिन पूरे मामले में अफसर जिस तरह से आक्रामक हुए है उसे देखकर लग रहा है कि यह सरकार के खिलाफ एक और सियासी साजिश है।

अंशु प्रकाश के साथ हुई कथित बदसलूकी और मारपीट के मामले को लेकर केजरीवाल सरकार और नौकरशाहों के बीच टकराव बढ़ता जा रहा है। अफसरों ने साफ कह दिया है कि जब तक मारपीट की बात को कबूल करते हुए सीएम केजरीवाल माफी नहीं मांगते, तब तक वे मुख्यमंत्री और अन्य मंत्रियों द्वारा बुलाई जाने वाली बैठकों का बॉयकॉट करेंगे।

मुख्य सचिव ने मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित कैबिनेट की बैठक में हिस्सा नहीं लिया। बैठक में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी मनोज परिदा शामिल हुए। इस बीच अधिकारियों के दो संगठनों ने इस सिलसिले में उपराज्यपाल अनिल बैजल से मुलाकात कर विरोध दर्ज कराया।

दिल्ली के कई विभागों में मंगलवार को लोगों को अपने काम कराने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा क्योंकि अधिकतर अधिकारियों ने इस घटना के विरोध में अपने काम का बहिष्कार किया।

दिल्ली सचिवालय में 200 से अधिक सरकारी कर्मचारी मुख्य सचिव पर कथित तौर पर हमला करने वालों की गिरफ्तारी की मांग पर अड़े रहे। दिल्ली सरकार कर्मचारी कल्याण संघ के अनुसार प्रकाश के समर्थन में करीब सात हजार कर्मचारियों ने अपने काम का बहिष्कार किया।

अधिकारियों के संघ की ओर से जारी बयान के मुताबिक, ‘दिल्ली के प्रशासनिक प्रमुख के सिर पर जिस तरह चोट की गई, वह जानलेवा हो सकती थी। यह निंदनीय है।’
बयान में यह मांग भी की गई है कि घटना के पीछे जिन लोगों का हाथ है उन सभी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।

जब से आम आदमी पार्टी सत्ता में आई है न तो पुलिस सहयोग कर रही है और न अफसरशाही। ऐसे में सरकार को घेरना और बैठकों का बायकॉट करना न तो जनता के हक में है और न लोकतंत्र के।