Friday, February 22, 2019
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संपादकीय

    Editorial by Sushil Swatantra

    युद्ध स्मारकों को जातीय चश्में से न देखा जाए

    नया साल हर तीन सौ पैंसठ दिनों के बाद आ जाता है लेकिन 2018 के पहले दिन को हम इस लिहाज से अलग कह...

    कौन बनाता है भारतीय मुसलामानों को संदिग्ध ?

    "जेंटलमैन, ब्लड ईज थिकर दैन वाटर " ⇒ मोहम्मद अली जिन्ना नेहरु और जिन्ना ने तो अपने स्वार्थ के कारण मुल्क को दो टुकड़ों में...

    पर्यावरण की रक्षा के लिए ईमानदार पहल की जरुरत

    पिछले दिनों दिल्ली सरकार ऑड-ईवन की वजह से खासी सुर्ख़ियों में रही| जहाँ एक ओर सरकार ने इसे प्रदूषण कम करने का कारगर तरिका...

    धूमिल होती महामंडलेश्वर पद की गरिमा और विश्वसनीयता

    संत समाज में महामंडलेश्वर की पदवी चाहे जितने भी प्रतिष्ठित क्यों न हो लेकिन गहरे विवादों के कारण इसकी गरिमा और विश्वसनीयता दिन-ब-दिन धूमिल...

    आग सब कुछ नहीं जला पाती…

    बहरहाल, समय बहुत ताकतवर है| इतना ताकतवर कि एक तरफ यह महरम बनकर पीड़ितों के जख्म भर रहा है, तो दूसरी तरफ गुजरात दंगों...

    प्रधानमंत्री की चुप्पी से संदिग्ध होता जा रहा है राफेल डील...

    राफेल विमान सौदा केंद्र सरकार और खासकर प्रधानमंत्री की निजी छवि के लिए घातक सिद्ध होता जा रहा है। इसमें कोई शक नहीं है...

    न्यूजरूम के तनाव से हो रही खबरनवीसों की मौतों से मालिक...

    मालिक की पूंजी का पेट मुनाफे से ही भरता है, इसलिए अखबार को हल हाल में छपना होता है। चाहे आतंकवादियों की गोली हो...

    मदर की तपस्या को मटियामेट करते अनुयायी

    जिस मदर टेरेसा के नाम पर भारत ही नहीं पूरी दुनिया को अपार भरोसा है, उनकी संस्था में अगर बच्चों की कीमत पचास हजार...

    नोटबंदी के दौरान हुई मौतों का हिसाब किसके पास है ?

    आज दो महत्वपूर्ण आरटीआई का जिक्र करना इसलिए जरुरी है क्यूंकि देश 72वें स्वतंत्रता दिवस का जश्न मनाने जा रहा है। यह कोई मामूली...