Thursday, April 25, 2019

दिवालिया उल्लू की दिवाली (व्यंग्य)

दिवाली तक आते आते पूरी तरह दिवालिया हो चुका हूं। बस, लक्ष्मी से अब यही कामना है कि मेरे पिछले चार साल से सरकार...

निष्‍पक्ष जांच स्टॉप आहे (व्यंग्य)

अभी बकरी की निष्‍पक्ष जांच चल ही रही थी कि अचानक जांच बीच में रूक गई तो मुजरिमों के बदले मैं परेशान हो उठा।...

कवि होने के साथ-साथ कुशल गायक और संगीतज्ञ भी थे ‘निराला’

पं. सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ के जीवन से साक्षात् करें, तो निःसंदेह ‘महाकवि’ के रूप में उनका बिंब स्पष्ट उभरता है। ‘निराला’ ‘रहस्यवादी’ कवि हैं...

राजस्थान में आयोजित होगा इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल, दिखाई जाएगी बच्चों की...

जयपुर, राजस्थान राजस्थान के श्रीगंगानगर शहर में जनवरी 2019 के अंतिम सप्ताह में फिल्म फेस्टिवल का आयोजन किया जा रहा है। आयोजकों के अनुसार यह...

प्लीज, जल्दी सजेस्ट कीजिए (व्यंग्य)

उन्होंने अबके दशहरे में जलाने को रावण का आधा पौना पुतला तैयार किया और मेरे घर मेरी कस्टडी में इसलिए छोड़ गए कि मैं...

बू (कहानी) : सआदत हसन मंटो

बरसात के यही दिन थे। खिड़की के बाहर पीपल के पत्ते इसी तरह नहा रहे थे सागवन के स्प्रिन्गदार पलंग पर, जो अब खिड़की...

स्वच्छताग्रहियों के हत्थे चढ़ गए बापू (व्यंग्य)

मेरे बापू भी देश के बापू की तरह प्रयोगधर्मी थे। वे भी परिवार के लिए तरह तरह के प्रयोग किया करते थे। पर उनके...

हमारी बेटियाँ (कविता) : आकांक्षा यादव

हमारी बेटियाँ घर को सहेजती-समेटती एक-एक चीज का हिसाब रखतीं मम्मी की दवा तो पापा का आफिस भैया का स्कूल और न जाने क्या-क्या। इन सबके बीच तलाशती हैं अपना भी वजूद बिखेरती...

दलित कवियों की दमदार उपस्थिति दर्ज कराएगी “बिहार-झारखण्ड की चुनिन्दा दलित...

अमूमन ऐसी चर्चा होती है कि दलित रचनाकारों को मुख्यधारा के साहित्यिक पटल पर समुचित स्थान नहीं मिल पाता है। ऐसी ही चिंता को...

शोकसभा के विविध आयाम (व्यंग्य) : सुशील सिद्धार्थ

मेरे सामने अजीब संकट आ गया है। इसे धर्मसंकट की तर्ज़ पर शोकसंकट कहना ही उचित है। मुझे किसी न किसी बहाने इस शोक...