Friday, February 22, 2019

पंच महाराज (व्यंग्य )- बालकृष्ण भट्ट

माथे पर तिलक, पाँव में बूट चपकन और पायजामा के एवज में कोट और पैंट पहने हुए पंच जी को आते देख मैं बड़े...

अंधा बांटे रेवड़ी (व्यंग्य)- अरविंद कुमार खेड़े

'अंधा बाँटे रेवड़ी, अपने अपने को...' यह मुहावरा है लोकोक्ति? यह गुणी ज्ञानी-जनों का विषय है। मेरी समस्या दूसरी है। क्यों कि मैं गुणी-ज्ञानी...

दलित कवियों की दमदार उपस्थिति दर्ज कराएगी “बिहार-झारखण्ड की चुनिन्दा दलित...

अमूमन ऐसी चर्चा होती है कि दलित रचनाकारों को मुख्यधारा के साहित्यिक पटल पर समुचित स्थान नहीं मिल पाता है। ऐसी ही चिंता को...

सिपाही की माँ (नाटक)- मोहन राकेश

देहात के घर का आँगन, अँधेरा और सीलदार आँगन के बीचोबीच एक खस्ताहाल चारपाई पड़ी है। एक और वैसी ही चारपाई दीवार के साथ...

अब्बा (संस्मरण) : शबाना आज़मी

कै़फ़ी आज़मी एक व्यक्ति न होकर एक पूरा युग हैं और उनके कलाम आज भी असरदार हैं। मशहूर लेखक और पत्रकार खुशवन्त सिंह ने कैफ़ी...

कूड़ा बीनते बच्चे (कविता)- अनामिका

उन्हें हमेशा जल्दी रहती है उनके पेट में चूहे कूदते हैं और खून में दौड़ती है गिलहरी ! बड़े-बड़े डग भरते चलते हैं वे तो उनका ढीला-ढाला कुर्ता तन जाता...

खूँटियों पर टँगे दिन (कविता)- अनूप अशेष

खूँटियों पर टँगे दिन फटती कमीजों से रहे धूल पीती साँस टूटे घरों का संत्रास, आँवे के नीचे रहे ज्यों किसी का रहवास मोटे लिबासों बीच पतली समीजों-से रहे। बड़े घर की ओट...

द रॉयल घोस्ट (कहानी)- तरुण भटनागर

'...चल-चल आज तो दिखा ही दे, क्या है उस ट्रंक में। मान जा यार।' पिता बिट्टो बुआ से निवेदन कर रहे थे। बिट्टो बुआ को...

मीडिया विमर्श (कविता)- मंगलेश डबराल

उन दिनों जब देश में एक नई तरह का बँटवारा हो रहा था काला और काला और सफेद और सफेद हो रहा था एक तरफ लोग...

सावधान! मैं किताब लिख रहा हूँ (व्यंग्य)- संजय जोशी “सजग”

ऋषभ जी एक चिंतक और लेखक हैं। इस क्षेत्र में थोड़ा बहुत उनका नाम भी है और पेशे से अध्यापक जो हैं, अपने कार्यस्थल...