Saturday, March 23, 2019

गरीबी पर एक गंभीर चर्चा (व्यंग्य)- अर्चना चतुर्वेदी

विश्वास मानिए जितना हमारा देश बड़ा है, हमारे देशवाशियों का दिल उससे भी बहुत बड़ा है। उस बड़े दिल में गरीबों की चिंता भरी...

यह धरती सबकी है-(बाल कहानी)- सत्यनारायण भटनागर

शेरू, स्वीटी और कालू अस्पताल क्षेत्र में स्थाई रूप से निवास करते हैं। शेरू खूंखार दिखता है। जब गुस्सा आता है, तब दहाड़ता है...

युद्ध के मालिक (कविता)- बॉब डिलन

आओ युद्ध के मालिकों तुमने ही बनाईं सारी बंदूकें तुमने ही बनाए मौत के सारे हवाई जहाज तुमने बम बनाए तुम जो दीवारों के पीछे छिपते हो छिपते फिरते...

जिंदा रहना चाहता है इंसान (कविता)- बोरीस स्लूत्स्की

जिंदा रहना चाहता है जिंदा इंसान। जिंदा रहना चाहता है मौत तक और उसके बाद भी। मौत को स्थगित रखना चाहता है मरने तक निर्लज्ज हो चाहता...

पंच महाराज (व्यंग्य )- बालकृष्ण भट्ट

माथे पर तिलक, पाँव में बूट चपकन और पायजामा के एवज में कोट और पैंट पहने हुए पंच जी को आते देख मैं बड़े...

कूड़ा बीनते बच्चे (कविता)- अनामिका

उन्हें हमेशा जल्दी रहती है उनके पेट में चूहे कूदते हैं और खून में दौड़ती है गिलहरी ! बड़े-बड़े डग भरते चलते हैं वे तो उनका ढीला-ढाला कुर्ता तन जाता...

कहानी: कितने पाकिस्तान- कमलेश्वर -भाग 1

कितना लम्बा सफर है! और यह भी समझ नहीं आता कि यह पाकिस्तान बार-बार आड़े क्यों आता रहा है। सलीमा! मैंने कुछ बिगाड़ा तो...

मीडिया विमर्श (कविता)- मंगलेश डबराल

उन दिनों जब देश में एक नई तरह का बँटवारा हो रहा था काला और काला और सफेद और सफेद हो रहा था एक तरफ लोग...

हत्या की राजनीति (कहानी)- अनुराग शर्मा

कल तक जिस गाँव में श्मशान सा सन्नाटा छाया हुआ था आज वहाँ कुंभ मेले जैसी गहमागहमी है। लोगों का हुजूम समुद्र की लहरों...

इतवार और तानाशाह (कविता)- मणि मोहन

आज इतवार है अपने घर पर होगा तानाशाह एकदम अकेला... क्या कर रहा होगा ? गमलों में लगे फूलों को डाँट रहा होगा ! हाथों में कैंची लिए लताओं के पर...