Tuesday, May 21, 2019

अजनबी देश है यह (कविता) -सर्वेश्वरदयाल सक्सेना

अजनबी देश है यह, जी यहाँ घबराता है कोई आता है यहाँ पर न कोई जाता है जागिए तो यहाँ मिलती नहीं आहट कोई, नींद में जैसे...

कीचड़ महिमा न्यारी (व्यंग्य) – गोविंद सेन

मैं अक्सर कीचड़ चिंतन में डूबा रहता हूँ। इससे मुझे बहुत राहत मिलती है। यह मेरी थैरेपी है। जब मैं कीचड़ चिंतन में डूबता...

कोलकाता लघु पुस्तक मेला में कविता उत्सव का आयोजन किया गया

कोलकाता, रविन्द्र अकोकुरा भवन परिसर में आयोजित लिटिल मैगजीन मेले में मरुतृण साहित्य पत्रिका, सदीनामा साहित्य पत्रिका, साहित्य त्रिवेणी साहित्य पत्रिका एवं विनिर्माण (बंगला)...

कितना अच्छा होता है (कविता) : सर्वेश्वरदयाल सक्सेना

एक-दूसरे को बिना जाने पास-पास होना और उस संगीत को सुनना जो धमनियों में बजता है, उन रंगों में नहा जाना जो बहुत गहरे चढ़ते-उतरते हैं । शब्दों की खोज...

हम लड़ेंगे साथी : पाश

हम लड़ेंगे साथी, उदास मौसम के लिए हम लड़ेंगे साथी, ग़ुलाम इच्छाओं के लिए हम चुनेंगे साथी, ज़िन्दगी के टुकड़े हथौड़ा अब भी चलता है, उदास निहाई...

आदिवासी औरत रोती है (कविता)- महेश वर्मा

आदिवासी औरत रोती है गुफाकालीन लय में। इसमें जंगल की आवाज़ें हैं और पहाड़ी झरने के गिरने की आवाज़, इसमें शिकार पर निकलने से पहले जानवर...

विलुप्त हो रहे प्राणी (कविता)- आंद्रेइ वोज्नेसेन्स्की

विलुप्त हो रहे सभी प्राणियों का विवरण लिख दिया गया है मेरी श्वेत पुस्तिका में। चिंताजनक हैं ये कुछ लक्षण कि पहले तो वर्ष भर के लिए फिर...

खूँटियों पर टँगे दिन (कविता)- अनूप अशेष

खूँटियों पर टँगे दिन फटती कमीजों से रहे धूल पीती साँस टूटे घरों का संत्रास, आँवे के नीचे रहे ज्यों किसी का रहवास मोटे लिबासों बीच पतली समीजों-से रहे। बड़े घर की ओट...

चिड़ियाघर के तोते (कविता)- बुद्धिनाथ मिश्र

चिड़ियाघर के तोते को है क्या अधिकार नहीं पंख लगे हैं फिर भी उड़ने को तैयार नहीं। धरती और गगन का मिलना एक भुलावा है खर-पतवारों का सारे क्षितिजों पर दावा...

मुकदमा : हवा-पानी का (नाटक)- गोविंद शर्मा

पात्र: महाराज मंत्री हवा और पानी बने दो बच्चे कुछ लोग (महाराज का दरबार। महाराज सिंहासन पर बैठे हैं। एक तरफ मंत्री व दरबारीगण बैठे हैं, सामने अन्य लोग...