Tuesday, May 21, 2019

यह धरती सबकी है-(बाल कहानी)- सत्यनारायण भटनागर

शेरू, स्वीटी और कालू अस्पताल क्षेत्र में स्थाई रूप से निवास करते हैं। शेरू खूंखार दिखता है। जब गुस्सा आता है, तब दहाड़ता है...

रीढ़ की हड्डी (नाटक)- जगदीशचंद्र माथुर

उमा : लड़की रामस्‍वरूप : लड़की का पिता प्रेमा : लड़की की माँ शंकर : लड़का गोपालप्रसाद : लड़के का बाप रतन : नौकर बाबू : अबे, धीरे-धीरे चल!... अब...

जिंदा रहना चाहता है इंसान (कविता)- बोरीस स्लूत्स्की

जिंदा रहना चाहता है जिंदा इंसान। जिंदा रहना चाहता है मौत तक और उसके बाद भी। मौत को स्थगित रखना चाहता है मरने तक निर्लज्ज हो चाहता...

आलस्य-भक्त (व्यंग्य)- गुलाब राय

अजगर करै न चाकरी, पंछी करे न काम।      दास मलूका कह गए, सबके दाता राम ।। प्रिय ठलुआ-वृंद! यद्यपि हमारी सभा समता के पहियों पर...

वृद्धाएँ धरती की नमक हैं (कविता)- अनामिका)

'कपड़ा है देह', '...जीर्णाणि वस्त्राणि' ...वाला यह श्लोक 'गीता' का, सुना था कभी बहुत बचपन में पापा के पेट पर पट्ट लेटे-लेटे ! संदर्भ यह है कि दादाजी गुजर...

अमेरिका मुझे क्यों पसंद नहीं है (व्यंग्य)- हरि जोशी

मुझे अमेरिका क्यों पसंद नहीं। सबसे बड़ा कारण तो यह है कि वहां थूकने की स्वाधीनता बिलकुल नहीं है। मुझे आश्चर्य है, वह कैसा...

घनचक्कर (व्यंग्य)- विवेकी राय

कचहरी में बैठकर वह लगभग रो दिया था। ऐसा मामूली कार्य भी वह नहीं कर सकता? छोटे-छोटे आदमियों से असफल सिफारिश की खिन्‍नता लिए...

शोकसभा के विविध आयाम (व्यंग्य) : सुशील सिद्धार्थ

मेरे सामने अजीब संकट आ गया है। इसे धर्मसंकट की तर्ज़ पर शोकसंकट कहना ही उचित है। मुझे किसी न किसी बहाने इस शोक...

सिपाही की माँ (नाटक)- मोहन राकेश

देहात के घर का आँगन, अँधेरा और सीलदार आँगन के बीचोबीच एक खस्ताहाल चारपाई पड़ी है। एक और वैसी ही चारपाई दीवार के साथ...

आकाश से गोलियों की बौछार (कविता)- बोरीस स्‍कीस्‍लूत्‍

आकाश से गोलियों की बौछार की तरह तालुओं को जला रही है वोदका आँखों से टपकते हैं तारे जैसे गिर रहे हों बादलों के बीच से और...