Wednesday, July 17, 2019

मुंडन- हरिशंकर परसाई

किसी देश की संसद में एक दिन बड़ी हलचल मची। हलचल का कारण कोई राजनीतिक समस्या नहीं थी, बल्कि यह था कि एक मंत्री...

अंधा बांटे रेवड़ी (व्यंग्य)- अरविंद कुमार खेड़े

'अंधा बाँटे रेवड़ी, अपने अपने को...' यह मुहावरा है लोकोक्ति? यह गुणी ज्ञानी-जनों का विषय है। मेरी समस्या दूसरी है। क्यों कि मैं गुणी-ज्ञानी...

चिकित्सा का चक्कर (व्यंग्य)- बेढब बनारसी

मैं बिलकुल हट्टा-कट्टा हूँ। देखने में मुझे कोई भला आदमी रोगी नहीं कह सकता। पर मेरी कहानी किसी भारतीय विधवा से कम करुण नहीं...

असत्य ही सत्य है (व्यंग्य)- राजेंद्र त्यागी

यह गांधी का देश है। 'सत्य अहिंसा परमोधर्म' इस देश का मूलमंत्र है। इस मूलमंत्र का जाप करते हुए हम शत-प्रतिशत गांधी के बताए...

प्लीज, जल्दी सजेस्ट कीजिए (व्यंग्य)

उन्होंने अबके दशहरे में जलाने को रावण का आधा पौना पुतला तैयार किया और मेरे घर मेरी कस्टडी में इसलिए छोड़ गए कि मैं...

अश्लील (व्यंग्य) : हरिशंकर परसाई

शहर में ऐसा शोर था कि अश्‍लील साहित्‍य का बहुत प्रचार हो रहा है। अखबारों में समाचार और नागरिकों के पत्र छपते कि सड़कों...

एक कुत्ते की डायरी (व्यंग्य)- प्रभाकर माचवे

शनिचैव श्वापाके च पंडित: समदर्शिन:। (गीता) मेरा नाम 'टाइगर' है, गो शक्ल-सूरत और रंग-रूप में मेरा किसी भी शेर या 'सिंह' से कोई साम्य नहीं।...

क्रांतिकारी की कथा (व्यंग्य) : हरिशंकर परसाई

‘क्रांतिकारी’ उसने उपनाम रखा था। खूब पढ़ा-लिखा युवक। स्वस्थ, सुंदर। नौकरी भी अच्छी। विद्रोही। मार्क्स-लेनिन के उद्धरण देता, चे-ग्वेवारा का खास भक्त। कॉफी हाउस में...

पाकिस्तान समुंदर-ए-कुफ्र में एक रोशन जजीरा है (व्यंग्य)- पतरस बुखारी

यहां के लोग कुदरत की तमाम नेमतों से अरास्ता हैं। खूबसूरत झीलें, खुले मैदान, धूल, मिट्टी, शोर-ओ-गुल, सब इफरात से पाए जाते हैं। कोयला...

अपील का जादू (व्यंग्य) : हरिशंकर परसाई

एक देश है! गणतंत्र है! समस्याओं को इस देश में झाड़-फूँक, टोना-टोटका से हल किया जाता है! गणतंत्र जब कुछ चरमराने लगता है, तो...