Saturday, April 20, 2019

रीढ़ की हड्डी (नाटक)- जगदीशचंद्र माथुर

उमा : लड़की रामस्‍वरूप : लड़की का पिता प्रेमा : लड़की की माँ शंकर : लड़का गोपालप्रसाद : लड़के का बाप रतन : नौकर बाबू : अबे, धीरे-धीरे चल!... अब...

उखड़े खंभे (व्यंग्य) : हरिशंकर परसाई

कुछ साथियों के हवाले से पता चला कि कुछ साइटें बैन हो गयी हैं। पता नहीं यह कितना सच है लेकिन लोगों ने सरकार...

सिपाही की माँ (नाटक)- मोहन राकेश

देहात के घर का आँगन, अँधेरा और सीलदार आँगन के बीचोबीच एक खस्ताहाल चारपाई पड़ी है। एक और वैसी ही चारपाई दीवार के साथ...

सृजन की दुनियां

// दुनियां में एक तरफ जहां युद्ध और नफ़रतें हैं तो वहीं दूसरी तरफ सृजनकर्मियों का गढ़ा हुआ बहुत...

कहानी : ठंडा गोश्त – सआदत हसन मंटो

ईश्वरसिंह ज्यों ही होटल के कमरे में दांखिला हुआ, कुलवन्त कौर पलंग पर से उठी। अपनी तेज-तेज आँखों से उसकी तरफ घूरकर देखा और...

कहानी: कितने पाकिस्तान-  कमलेश्वर -भाग 2

गतांक से आगे ...... मैं जब भिवंडी पहुंचा तो दंगा खत्म हुए दस-बारह दिन हो चुके थे। घुसते ही बस्ती में जगह-जगह काले चकते दिखाई...

केयर ऑफ स्वात घाटी (कहानी) – मनीषा कुलश्रेष्ठ

''यह मेरी अस्मिता का प्रश्न है...विद्वता का अभिमान नहीं है मुझे। ज्ञान पर विश्वास अवश्य है। सब कहें तो कहें कि वाचकनु के ॠषिकुल...

अब कल आएगा यमराज (कहानी) – अभिमन्यु अनत

अपने गले में लटके मंगलसूत्र के तमगे को वह अपने अँगूठे और दो अँगुलियों के बीच उलटती-पलटती रही। उसकी सूखी आँखें चारदीवारी की कसमसाती...

आह को चाहिए इक उम्र असर होने तक : मिर्ज़ा ग़ालिब

मिर्ज़ा ग़ालिब  ग़ज़ल : आह को चाहिए इक उम्र असर होने तक आह को चाहिए इक उम्र असर होते तक कौन जीता है तिरी ज़ुल्फ़ के सर...

चुप रहकर क्यूँ सहना, मैंने तो मनचले की खाल नोंच ली...

लड़कियों प्रतिरोध करो, जायरा को चीखना चाहिए था। सिर आसमान पर उठा लेना चाहिए था। कोई आपको मोलेस्ट कर रहा है, तब आप चुप...