Print Friendly, PDF & Email

पुणे (नेशनल डेस्क)
सीबीआई ने रविवार (26 अगस्त) को यहां की एक अदालत में दावा किया कि बंगलूरू में पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या और अंधविश्वास विरोधी कार्यकर्ता डॉक्टर नरेंद्र दाभोलकर की पुणे में 2013 में हुई हत्या के तार एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।

सचिन आंदुरे की हिरासत को बढ़ाने की मांग करते हुए केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने अदालत से कहा कि लंकेश हत्याकांड मामले के आरोपियों में से एक ने उसे एक पिस्तौल और मैगजीन के साथ तीन गोलियां सौंपी थीं।

आंदुरे, दाभोलकर हत्या मामले में कथित तौर पर शामिल शूटरों में से एक था। प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट एच आर जाधव ने सीबीआई की इस दलील के बाद आंदुरे की सीबीआई हिरासत 30 अगस्त तक बढ़ा दी। उसे औरंगाबाद से पिछले सप्ताह गिरफ्तार किया गया था। दाभोलकर की हत्या के चार साल बाद गौरी की हत्या हुई थी। इन दोनों ही मामलों में सनातन संस्था समेत दक्षिणपंथी संगठनों की भूमिका संदिग्ध मानी जाती रही और अब यह जांच में सामने भी आ रहा है।

सीबीआई ने कहा कि उसने प्रमुख संदिग्धों में से एक सचिन अंधुरे की पुलिस हिरासत को बढ़ाने के लिए पुणे की शिवाजीनगर मैजिस्ट्रेट की अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखने के दौरान इस महत्वपूर्ण कड़ी को साबित किया है।

हालांकि अपनी रिमांड याचिका में सीबीआई ने किसी भी संगठन का नाम नहीं लिया है, जो इन मामलों में शामिल हो सकता है। रिमांड आवेदन में कहा गया कि पूछताछ के दौरान अंधुरे ने खुलासा किया कि गौरी लंकेश की हत्या मामले में गिरफ्तार आरोपियों में से एक ने उसे 7.65 एमएम की देसी पिस्तौल और तीन गोलियां सौंपी थी। बाद में अंधुरे ने दावा किया कि उसने इसे औरंगाबाद में अपने साले शुभम सुरले को 11 अगस्त, 2018 को दे दिया था।

सुरले ने इस हथियार को बाद में इसी शहर के अपने दोस्त रोहित रेगे को सौंप दिया, हालांकि इसका मकसद अभी स्पष्ट नहीं है। अंधुरे के नाम का खुलासा शरद कलास्कर ने किया था, जो पालघर के नाला सोपाड़ा का रहने वाला है। इसे महाराष्ट्र एटीएस ने 10 अगस्त को एक बड़े हथियारों के जखीरे के साथ गिरफ्तार किया था।

बताया गया है कि कलास्कर ने खुलासा किया कि ‘मोटरसाइकिल पर अंधुरे और वह खुद सवार था और उन दोनों ने ही दाभोलकर को उस दिन गोली मारी थी।’ इस नई सूचना के बाद सीबीआई कलास्कर को रिमांड पर लेने की योजना बना रही है। महाराष्ट्र एटीएस के पास उसकी रिमांड अवधि इस हफ्ते समाप्त हो रही है।

दाभोलकर की अगस्त 2013 में सुबह की सैर के दौरान गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। लंकेश की सितंबर 2017 में बंगलूरू में उनके आवास के सामने गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।