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देश में राजनीतिक साजिशों, कट्टरवाद और सत्ता के दुरुपयोग का दौर चल रहा है। जो भी सरकार की हां में हां नहीं मिलाता या तो गायब हो जाता है, या एनकाउंटर का शिकार हो जाता है। यह बात एक एक करके समाज और देश के सामने आ रही है।

संकेत समझें तो जजों के जनता कर सामने न्याय की गुहार लगाना भी उसी कड़ी का एक हिस्सा था। और अब जब प्रवीण तोगड़िया ने अपनी जान को लेकर खतरा बताया है तो यह साफ हो जाता है कि मामला संगीन है।

तोगड़िया प्रकरण के बाद दलित नेता और गुजरात के वडगाम से विधायक जिग्नेश मेवानी का कहना है कि उनकी जान को खतरा है और बीजेपी-आरएसएस उन्हें रास्ते से हटाना चाहते हैं।

मेवानी ने कहा, ‘मेरे मन में भी वीएचपी नेता प्रवीण तोगड़िया की तरह डर है। मुझे भी इस बात का डर है कि कुछ लोग मेरी हत्या कर सकते हैं। बीजेपी और आरएसएस के लोग मुझे मार सकते हैं। मुझे सूत्रों के हवाले से पता चला है कि वे लोग मुझे रास्ते से हटाना चाहते हैं।’

दरअसल, विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष प्रवीण तोगड़िया ने बताया था कि उन्हें कुछ लोग मारना चाहते हैं। उन्होंने कहा था कि वह हिंदुओं की ओर से प्रमुखता से आवाज उठा रहे हैं इसलिए कुछ वक्त से उनकी आवाज दबाने को कोशिश की जा रही है।

तोगड़िया ने बताया था, ‘मैंने देश के डेढ़ हजार डॉक्टरों को सेवा के लिए तैयार किया और अब सेंट्रल आईबी मुझे मारना चाहती है। केंद्र को मैंने इस मामले में पत्र भी लिखा। आईबी मुझे डरा रही है। मेरी आवाज दबाने के लिए कानून भंग के मामले दर्ज किए जा रहे हैं।’

इधर हाल में विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. प्रवीण तोगड़िया ने सीधा-सीधा पीएम नरेंद्र मोदी पर हमला बोल दिया।

तोगड़िया ने साफ किया कि दिल्ली के राजनीतिक बॉस (पीएम मोदी) के इशारे पर क्राइम ब्रांच के जॉइंट कमिश्नर जे. के. भट्ट उनके खिलाफ और वीएचीपी के कार्यकर्ताओं के खिलाफ षड्यंत्र कर रहे हैं।

तोगड़िया ने मांग की कि भट्ट और पीएम नरेंद्र मोदी के बीच हुई बातचीत को सार्वजनिक किया जाए।

बहरहाल ये जो हालात है देश के लोकतांत्रिक ढांचे के लिए न सिर्फ खतरा हैं बल्कि अभिव्यक्ति की आज़ादी के भी खिलाफ हैं।