(फाइल फोटो)
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भारत के दशहरा की बात दिनया में जहाँ भी होती है, मैसूर के दशहरे की जगमगाहट का जिक्र जरूर आता है। कर्नाटक के मैसूर का दशहरा दुनियाभर में मशहूर है। कल रात को मैसूर पैलेस को बेहद ही खूबसूरत ढंग से सजाया गया। मैसूर पैलेस रोशनी से नहा रहा था। पूरे मैसूर शहर को भी रोशनी से सजाया गया है।

मैसूर में लगभग सात सदी पुरानी परंपरा वाला यह पर्व ऐतिहासिक दृष्टि से तो महत्त्वपूर्ण है ही, साथ ही यह कला, संस्कृति और आनंद का भी अद्भुत सामंजस्य है। महालया से दशहरे तक इस नगर की फूलों, दीपों एवं विद्युत बल्बों से सुसज्जित शोभा देखने लायक़ होती है। मैसूर में ‘दशहरा उत्सव’ का प्रारंभ चामुंडी पहाड़ियों पर विराजने वाली देवी चामुंडेश्वरी के मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और दीप प्रज्ज्वलन के साथ होता है। इस उत्सव में मैसूर महल को 97 हज़ार विद्युत बल्बों तथा 1.63 लाख विद्युत बल्बों से चामुंडी पहाड़ियों को सजाया जाता है। पूरा शहर भी रोशनी से जगमगा उठता है। जगनमोहन पैलेस, जयलक्ष्मी विलास एवं ललिता महल का अद्भुत सौंदर्य देखते ही बनता है।

धर्मग्रंथों के अनुसार इस दिन देवी दुर्गा ने महिषासुर का संहार भी किया था इसलिए भी इसे विजयदशमी के रुप में मनाया जाता है। आज मां दुर्गा की प्रतिमा का भी विसर्जन किया जाएगा। नौ दिनों तक चले नवरात्र भी इसी के साथ खत्म हो जाएगा।

मैसूर पैलेस की जगमगाहट के साथ ही दिल्ली से लेकर कोलकाता तक लगे दुर्गा पूजा पंडाल से मां दुर्गा, लक्ष्मी, सरस्वती, भगवान गणेश और कार्तिकेय की प्रतिमाओं का विसर्जन शुरू हो जाएगा।