Print Friendly, PDF & Email

नई दिल्ली / लखनऊ (नेशनल डेस्क)।
लोकसभा चुनाव अपने आखिरी चरण के मुहाने पर आ गया है और इसी के साथ तीसरे मोर्चे की कवायद तेज हो गयी है। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू को गठबंधन की राजनीती के सूत्रधार के रूप में देखा जाता रहा है। 18 मई को नायडू ने लखनऊ में बीएसपी प्रमुख मायावती से मुलाकात की। आपको बता दें कि इससे पहले उन्होंने समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, एनसीपी प्रमुख शरद पवार, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया से भी मुलाक़ात की थी। 23 मई को आने वाले चुनावी नतीजे को ध्यान में रखते हुए इन मुलाकातों को काफी अहम माना जा रहा है। चंद्रबाबू नायडू लोकसभा चुनाव के परिणाम आने के बाद बनने वाली संभावनाओं को लेकर विभिन्न पार्टियों के शीर्ष नेताओं से मिल रहे हैं।

माना जा रहा है कि तीसरे मोर्चे को बनाने के लिए कांग्रेस की ओर से कोशिश तेज हो गई है और इसी सिलसिले में नेताओं के मिलना हो रहा है। कांग्रेस ने कहा है कि वह एक प्रगतिशील और धर्मनिरपेक्ष सरकार के गठन को लेकर प्रतिबद्ध है और गठबंधन का नेतृत्व करने के लिए तैयार है। गौरतलब है कि एक दिन पहले ही पार्टी के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा था कि यदि कांग्रेस सबसे बड़े दल के रूप में उभरती है, तो तब भी उसे किसी क्षेत्रीय नेता का समर्थन करने से कोई गुरेज नहीं होगा।

सूत्रों का कहना है कि विपक्षी दलों को साथ लाने के लक्ष्य से यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी ने अपने विश्वासपात्र नेताओं से कहा है कि वे 23 मई को चुनाव परिणाम की घोषणा के साथ ही एक बैठक बुलाएं। कांग्रेस पार्टी के नेता गुलाम नबी आजाद ने गुरुवार को शिमला में कहा था, ‘‘मेरा पार्टी आलाकमान पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि कांग्रेस को किसी क्षेत्रीय पार्टी से प्रधानमंत्री बनाने में कोई गुरेज नहीं है।” हालांकि अपने रुख में कुछ बदलाव करते हुए आजाद ने कहा, ‘‘यह सच नहीं है कि कांग्रेस प्रधानमंत्री पद के लिए दावा नहीं करेगी। कांग्रेस सबसे बड़ी और पुरानी पार्टी है, यदि सरकार को पांच साल चलाना है तो उसे मौका मिलना चाहिए।”

कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि ‘‘राहुल गांधी और कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि वे भिन्न मतों वाले लोगों और राजनीतिक दलों को साथ लेकर चलना चाहेंगे। अगर जरूरत महसूस हुई तो हम उन्हें साथ लेकर चलने के लिए अपनी ओर से कोशिश करेंगे। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस देश में प्रगतिशील, उदारवादी, लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष सरकार के गठन के लिए प्रतिबद्ध है।” सुरजेवाला ने कहा कि कांग्रेस को विश्वास है कि लोकसभा चुनाव में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरेगी।

इसी तरह कम्युनिस्ट पार्टियाँ भी देश में चुनाव परिणाम के बाद एक गैर-भाजपाई, धर्मनिरपेक्ष और लोकतान्त्रिक गठबंधन को समर्थन देने का संकेत दे चुकी हैं।