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समाजवादी पार्टी में जारी दंगल अब खत्म होने के कगार पर है |साइकल चुनाव चिह्न मुलायम या अखिलेश गुट में किसका होगा| इस बात से परदा 13जनवरी को यानी आज हट सकता है। अगर इस हाई वोल्टेज राजनीतिक दंगल में कोई और पेच बचा है तो इसका भी पता चल जाएगा। आज होने वाले इस दंगल में अंपायर की भूमिका में चुनाव आयोग उतरेगा| 12 बजे आयोग इन दोनों गुटों की सुनवाई करेगा। समाजवादी पार्टी के दोनों गुट ने खुद को असली समाजवादी पार्टी बताते हुए साइकल सिंबल पर अपना दावा ठोंका है।

आयोग में इस मामले में सुनवाई एक ट्रिब्यूनल की तर्ज पर होगी यानी जैसे अदालत में की जाती है| सुनवाई के दौरान तीनों चुनाव आयुक्तों के साथ चुनाव आयोग के कानूनी सलाहकार भी मौजूद रहेंगे|

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चुनाव आयोग में आज होने वाले फैसले से पहले दोनों गुट ने रणनीति पर काम करने के लिए 12जनवरी को पूरे दिन कानूनी राय ली। अखिलेश गुट की ओर से रामगोपाल यादव और नरेश अग्रवाल इसकी जिम्मेदारी संभाल रहे हैं| वहीं मुलायम सिंह गुट की ओर से इसकी जिम्मेदारी अमर सिंह और शिवपाल सिंह यादव उठा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, 12जनवरी को भी दोनों गुट के बीच समझौते की कोशिश जारी रही। सूत्रों के अनुसार, अंतिम समय में दोनों गुटों को आपस में बातकर आयोग से आवेदन वापस लेने का आग्रह किया गया। दोनों गुटों के बीच बहुत सकारात्मक बातचीत हुई और कोई ठोस नतीजा निकलने के आसार हैं। अंतिम समय में यह रणनीति बनी कि आयोग से 3-4 दिनों का समय लेकर समझौते के लिए वक्त मांग लें और इस बीच दोनों गुट कोई आम समझौता प्लान तैयार कर लें। गौरतलब है कि यूपी विधानसभा चुनाव में पहले चरण के लिए 17 जनवरी से नॉमिनेशन की प्रक्रिया शुरू होगी।

एक तरफ सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने अपने पक्ष में आयोग को मुख्य रूप से तीन दस्तावेज दिए हैं| जिसमे पहला समाजवादी पार्टी का संविधान है| दूसरा रामगोपाल यादव की बर्खास्तगी की चिट्ठी है वही तीसरा एक पत्र जिसमें कहा गया है कि रामगोपाल ने जो सम्मेलन बुलाया वह असंवैधानिक है|

वही दूसरी तरफ अखिलेश पक्ष की तरफ से रामगोपाल यादव ने  आयोग से कहा है कि सम्मेलन बुलाने के लिए उन्हें अधिकृत किया गया था| 55 प्रतिशत सदस्यों ने सम्मेलन के लिए सहमति दी थी जबकि संविधान के मुताबिक 40 प्रतिशत से अधिक सदस्य लिखित में दें तो पार्टी संविधान के हिसाब से आपात अधिवेशन बुलाया जा सकता है| साथ ही रामगोपाल यादव ने 200 से अधिक विधायकों और 15 से अधिक सांसदों के समर्थन की चिट्ठी भी दी है|

सपा में जरी महासंग्राम में सवाल सिर्फ इतना सा है कि क्या समाजवादी पार्टी का नाम और निशान बचा रहेगा या उसे फ्रीज कर दिया जाएगा? पिछ्ले कई महीने से चले आ रहे इस दंगल में पार्टी मैच रेफरी के तौर पर चुनाव आयोग क्या फैसला लेता है| किसे असली पार्टी माना जाए| अब देखना यह है कि साइकल चलती है या पंचर हो जाती है| या इसको बेटा चलाएगा या बाप |