आखिरकार लालू को मिली सजा- साढ़े 3 साल की जेल और 5 लाख का जुर्माना

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काफी समय से लालू प्रसाद यादव को चारा घोटाले में सजा सुनाने का एलान होने की बात थी लेकिन फैसला लगातार टलता जा रहा था।

पर अब फैसला आ चुका है। बता दें कि चारा घोटाले के एक मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने आरजेडी सुप्रीमो और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को साढ़े तीन साल की सजा सुनाई है। इसके अलावा कोर्ट ने लालू पर 5 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

बड़ी बात यह है कि लालू समेत सभी दोषियों को जमानत नहीं मिलेगी। इसके लिए उन्हें उच्च अदालत में जाना होगा। देवघर कोषागार से अवैध तरीके से 89.27 लाख रुपये निकालने के मामले में यह बड़ा फैसला आया है।

विडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के जरिए लालू समेत सभी 16 दोषियों ने रांची की बिरसा मुंडा जेल में एक साथ बैठकर जज का फैसला सुना। मामले में दोषी ठहराए गए फूल चंद्र, महेश प्रसाद, बी. जूलियस, राजाराम, राजेंद्र प्रसाद, सुनील कुमार, सुधीर कुमार और सुशील कुमार को भी 3.5 साल की सजा सुनाई गई है।

गौरतलब है कि पिछले साल 24 दिसंबर को सीबीआई जज ने 1990-1994 के बीच देवघर के सरकारी कोषागार से 89.27 लाख रुपये की अवैध निकासी के मामले में लालू प्रसाद यादव समेत 16 लोगों को दोषी करार दिया था। अदालत ने पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा समेत छह आरोपियों को बरी कर दिया था। सजा का फैसला 3 जनवरी को ही आना था पर तारीख एक-एक दिन कर टलती जा रही थी।

इससे पहले लालू के वकील ने कोर्ट में दलील दी थी कि, ‘लालू डायबीटीज और ब्लड प्रेशर के मरीज हैं और वह गुरुवार को लगभग बेहोश हो गए थे।’ कोर्ट ने जिन आरोपियों को चारा घोटाले के इस मामले में दोषी करार दिया है, उनमें लालू प्रसाद यादव के अलावा आरके राणा, जगदीश शर्मा, तीन आईएएस अधिकारी तत्कालीन वित्त आयुक्त फूलचंद सिंह, पशुपालन विभाग के तत्कालीन सचिव बेक जूलियस एवं एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी महेश प्रसाद भी शामिल हैं।

1996 में पटना उच्च न्यायालय ने चारा घोटाले में जांच के आदेश दिए थे। देवघर ट्रेजरी केस में 1997 में 38 लोगों पर चार्जशीट दाखिल हुई। इनमें 11 की मौत हो चुकी है, जबकि 3 सरकारी गवाह बन गए। 2 ने गुनाह कबूल कर लिया था। जिन आरोपियों को अदालत ने चारा घोटाले के इस मामले में दोषी करार दिया था, उनमें बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव, तीन आईएएस अधिकारी समेत कई वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हैं।

इस फैसले के बाद एक बात तो साफ़ हो गयी है कि कानून सबके लिए एक सामान है लेकिन मामला इतने साल लंबित रहा कि कईयों को यह सजा कम भी लग रही है।





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