डिप्रेशन का सबसे कारगर व सस्ता इलाज जान लीजिए

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हम डिप्रेशन के बारे में जितना सोचते हैं, उसका प्रकोप उससे कहीं अधिक है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार दुनिया भर में सभी उम्र के 35 करोड़ लोग डिप्रेशन से पीड़ित हैं। चिकित्सीय साक्ष्यों से पता चलता है कि पहले से ही डिप्रेशन का अनुभव करने वाले करीब 60 प्रतिशत लोगों के निकट भविष्य में इससे दोबारा पीड़ित होने की संभावना है। इसका मुकाबला करने के लिए और इसे खत्म करने के लिए संवाद एक कारगर जरिया हो सकता है।

क्लिनिकल डिप्रेशन प्रकृति में अक्सर बढ़ने वाला होता है। लंबे समय में यह हल्के से लेकर मध्यम दर्जे की निराशा, लाचारी, या यहां तक कि अव्यवहारिकता की भावना पैदा कर सकता है और शारीरिक लक्षण प्रकट कर सकता है जिसमें शारीरिक इलाज से कोई फायदा नहीं होता है (जैसे सिर दर्द और उच्च रक्तचाप)।

जब कोई मनोचिकित्सक आपका परीक्षण करता तो वह इलाज के लिए आम तौर पर दो समानांतर दृष्टिकोण को अपनाता है। एक तरफ आपको एंटी एंग्जाइटी दवा दी जाएगी जिसकी अगर जरूरत है और साथ ही आपको क्लिनिकल काउंसलिंग सत्र के लिए भेजा जाएगा।

सार्थक भावनात्मक बातचीत करें या जो लोग आपकी परवाह करते हैं, उन्हें अपने मन की बात कहें। ऐसे व्यक्ति चिकित्सक ही नहीं आपके अपने भी हो सकते हैं। ऐसा करने से आपको प्रेरणा और आत्मविश्वास हासिल करने में मदद मिल सकती है, खासकर जब आप, खुद को अलग- थलग, खाली या निराश महसूस करते हैं। चुप रहने वाले व्यक्ति की मानसिक पीड़ा और बढ़ सकती है।

यही कारण है कि रोगियों को बात करने के लिए स्पष्ट रूप से प्रोत्साहित किया जाता है। यदि आप बिना किसी स्पष्ट कारण के बेपरवाह और दुःखी महसूस कर रहे हैं तो आप अपने सबसे अच्छे दोस्त को बुलाकर उसके साथ बात करें। यह उस समय आपके लिए सबसे अच्छा इलाज हो सकता है। हालांकि प्रोफेशनल काउंसलर से मदद लेना भी उपयोगी साबित होता है।

(डॉ. एस. सुदर्शनन, वरिष्ठ कंसल्टेंट साइकिएट्री, वेंकटेश्वर हास्पिटल, द्वारका से बातचीत पर आधारित)





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