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नई दिल्ली
केंद्र सरकार ने देश के तीन बड़े बैंकों का विलय करने का फैसला किया है। बैंक ऑफ बड़ौदा, विजया बैंक और देना बैंक का विलय कर एक बैंक करने का निर्णय लिया है। मर्ज होने के बाद यह देश का तीसरा सबसे बड़ा बैंक बनेगा। इस बात की जानकारी वित्तीय सेवा के सचिव राजीव कुमार ने दी। सचिव राजीव कुमार ने एक प्रेसवार्ता में कहा कि बैंकों के विलय के दौरान कर्मचारी हितों का खास ध्यान रखा जाएगा।

यह निर्णय बैंकों की कर्ज देने की ताकत उबारने और आर्थिक वृद्धियों को गति देने के सरकार के प्रयासों का हिस्सा है। उल्लेखनीय है कि पिछले साल भारतीय स्टेट बैंक ने अपनी पांच अनुषंगी इकाइयों का स्वयं में विलय किया था। साथ ही महिलाओं के लिये गठित भारतीय महिला बैंक को भी मिलाया था।

राजीव कुमार ने कहा कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की पांच सहयोगी बैंकों के विलय में भी किसी कर्मचारी की नौकरी नहीं गई थी। विलय के बाद तीनों बैंक स्वतंत्र रूप से काम करना जारी रखेंगे। राजीव ने कहा कि बैंकों के विलय से उपभोक्ता सेवाएं और दक्षता में काफी सुधार आएगा। उन्होंने इस निर्णय को रणनीतिक बैंकिंग सुधारों की अगली पीढ़ी कहा।
राजीव ने कहा कि सरकार ने पिछले चार सालों में बैंकिंग के संबंध में और बेहतर ऋण प्रक्रिया सुनिश्चित करने को लेकर कई सुधार किए हैं।

उन्होंने कहा कि पिछली तिमाही में एनपीए (गैर निष्पादित संपत्ति) का शेयर 21 हजार करोड़ रुपये कम हो गया था। वित्तीय वर्ष 2019 की पहली तिमाही में बैंकों ने 36,551 करोड़ रुपयों की वसूली की। विकास गति को बढ़ाने के लिए स्तर और तालमेल बढ़ाने की जरूरत थी।

बैंकों के विलय को लेकर वित्त मंत्री अरण जेटली ने कहा कि सरकार ने बजट में पहले ही घोषणा कर दी थी कि बैंकों का विलय हमारा एजेंडे में है। यह उस दिशा में पहला कदम है। बता दें कि इन बैंकों के विलय पर पहले भी चर्चा होती रही थी। 2017 में देना बैंक और विजया बैंक का केनरा बैंक में विलय करने की योजना बनी थी लेकिन, इसे अमली जामा नहीं पहनाया जा सका था।