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अक्सर लोगों से यह कहते सुना होगा कि अंगूर खट्टे हैं इसलिए उन चीज के लिए मना किया जा रहा है। हालांकि उस कहावत के पीछे एक अलग कहानी है लेकिन हम जो आपको बता रहे हैं उसके बारे में जानकर आप अंगूरों की इस कहावत को भूल जाएंगे।

दरअसल अंगूर सिर्फ एक फ्रूट नहीं है बल्कि में एक बड़े मर्ज की दवा है। इस मर्ज म नाम है तनाव, डिप्रेशन। जी हां, आजकल डिप्रेशन से बड़ा कोई मर्ज नहीं है।

ऐसे में अगर आप डिप्रेशन जैसी परेशानी से बचना चाहते हैं तो अंगूर जरूर खाएं। अंगूर खाने से मनोविकार कम होता है। यह बात एक हालिया शोध में उजागर हुई है।

शोधकर्ताओं का कहना है कि भोजन में अंगूर को शामिल करने से मानसिक स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है, जबकि अंगूर रहित आहार का सेवन करने वालों को निराशा व हताशा जैसे विकारों के लिए चिकित्सकों की शरण लेना पड़ सकती है।

ऑनलाइन ‘नेचर कम्यूनिकेशंस’ में प्रकाशित शोध के नतीजे बताते हैं कि भोजन में अंगूर से मिलने वाले नैसर्गिक तत्वों से हताशा जैसे मनोविकार कम हो सकते हैं।

मुख्य शोधकर्ता व न्यूयॉर्क के इकाह्न स्कूल ऑफ मेडिसिन में प्रफेसर गियूलियो मारिया पसिनेत्ती ने कहा, ‘अंगूर रहित पोलीफिनॉल कम्पाउंड उत्तेजना से जुड़े कोशिकीय व आणविक मार्ग को निशाना बनाता है। लिहाजा इस संबंध में की गई नई खोज से निराशा व चिंताग्रस्त लोगों का इलाज संभव हो पाएगा।’

अगर यह शोध सही है जो कि लगता है तो अंगूर खाने से दो लाभ होंगे। पहला तो यह कि फ्रूट का फायदा है दूसरा दवा का भी काम हो जाएगा।