बराबर सैलरी नहीं दी तो जुर्माना लगाएगा यह देश

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दुनिया भर में महिला और पुरुष के साथ गैर बराबरी का सलूक किया जाता है। फिर चाहे वह घर की बात हो या बाहर की। खासतौर से काम करने वाले दफ्तरों में तो उन्हें कई तरह के भेदवाव से गुजरना पड़ता है।

मसलन मानसिक और शारीरिक शोषण। इसके अलावा उनके साथ सैलरी देने को लेकर भी पक्षपात होता है।
ऐसे में एक देश ने सामाजिक बदलाव की दिशा में जोरदार कदम उठाते हुए कानून बनाया है कि हर कंपनी को महिला और पुरुष में बराबर की सैलरी देनी होगी। वरना उस पर जुर्माना लगेगा।

क्या है पूरा मामला, आइये जानते हैं। दरअसल महिलाओं को पुरुषों के मुकाबले उन्हें कम सैलरी मिलती है। मगर दुनिया के एक देश ने इस मामले में इतिहास रचा है।

आइसलैंड पहला देश बन गया है, जहां पर अब से महिलाओं को पुरुषों के बराबर सैलरी मिलेगी। यानी लिंग के आधार पर उनकी सैलरी को लेकर भेदभाव नहीं किया जाएगा।

फिर भी अगर कंपनियां उन्हें पुरुषों के बराबर सैलरी नहीं देती हैं तो उन्हें प्रतिदिन के हिसाब से 500 डॉलर्स (31,703 रुपए) का जुर्माना चुकाना पड़ेगा।

बता दें कि वर्ल्ड इकनॉमिक फोरम के शोध के अनुसार विश्व के अधिकतर देशों में महिलाओं को पुरुषों से कम सैलरी मिलती है। ऐसे में आइसलैंड की ओर से इस ओर उठाया गया यह कदम बेहद क्रांतिकारी मालूम पड़ता है।
महिलाओं और पुरुषों की सैलरी से जुड़ा यह कानून  1 जनवरी 2018 को प्रभाव में आया। यहां यह सभी कंपनियों और संगठनों पर लागू होगा, जिसमें न्यूनतम 25 कर्मचारी होंगे।

हमें ऐसे देशों से सबक लेने की जरूरत है। क्योंकि हम अपने देश में औरतों को देवी का दर्जा तो देते हैं लेकिन जन्हें शोषित भी खूब करते हैं।





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