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चीन के साथ भारत की तनातनी कोई नई बात नहीं है। पहले डोकलाम विवाद पर दोनों देशों के बीच खूब तनाव पैदा हुआ। एक समय हाल ऐसा था जब लगा दोनों देशों के बीच युद्ध जैसे हालात पैदा हो गए थे। दोनों तरफ से बयानबाजी भी काफी कड़वी जबान में होती रही।

फिर भले ही माहौल जैसे तैसे ठीक हुआ था कि अमेरिका की भारत के साथ बढ़ती नजदीकी से तंग आकर चीन ने पाकिस्तान को आगे करना शुरू किया। इतना ही नहीं वन बेल्ट परियोजना में उसने पाक को भारत से ज्यादा तरजीह दी।

आज भी सीमा पर भारत और चीन के बीच विवाद चल रहा है। लेकिन चीन के एक बयान को लेकर देश मे मीडिया ऐसी खबर फैला रहा है मानों चीन ने भाजपा की तारीफ कर उसके सामने घुटने टेक दिए हैं।

दरअसल चीन ने मोदी सरकार की विदेश नीति पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। चीन ने कहा है कि मोदी सरकार में भारत की विदेश नीति काफी जीवंत और मुखर हुई है।

चीन के एक प्रमुख सरकारी थिंक-टैंक के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में भारत की जोखिम लेने की क्षमता बढ़ रही है। चीन के विदेश मंत्रालय से संबद्ध थिंक-टैंक के अधिकारी ने कहा कि भारत ने काफी अलग और अद्वितीय ‘मोदी डॉक्ट्रीन’ बनाई है। नए हालात में एक महाशक्ति के तौर पर भारत के उभार की यह एक रणनीति है।

चीनी विशेषज्ञ ने कहा कि भारत के विकास में चीन कोई बाधा नहीं है बल्कि भारत के लिए एक बड़ा अवसर है। रोंग ने कहा, ‘कोई भी भारत के उत्थान को रोक नहीं सकता है। भारत के विकास में सबसे बड़ी बाधा भारत खुद है।’

ये सब बातें सुनकर भाजपा सरकार भले ही देश को यह संदेश देना चाहे की चीन भारत के सामने झुक रहा है लेकिन इस में चीन की कूटनीतिक चाल छिपी है। वह भारत के सामने एक बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और भारत को उसकी बराबरी करने में साल लग जाएंगे।
ऐसे में चीन की चिकनी चुपड़ी बातों में आने से बचकर देश के विकास को लेकर भाजपा सरकार को गंभीर कदम उठाने चाहिए।

चीन भारत के बाजार को अपने फायदे के लिए इस्तेमाल कर रहा है और भारत को चीन से सबक लेकर उसी की जुबान में उसे जवाब देना सीखना होगा।