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नील माधब पांडा द्वारा निर्देशित ‘कड़वी हवा’ जलवायु परिवर्तन के वास्तविक खतरे को दर्शाने वाली एक शक्तिशाली और हृदय को झकझोर देने वाली फिल्म है। इस फिल्म में रणवीर शौरी एक युवा बैंक ऋण वसूली एजेंट, जबकि संजय मिश्रा एक अंधे बुजुर्ग किसान के रूप में दिखेंगे। इसमें दिखाया गया है कि दो आम लोग दो अलग-अलग मौसम की स्थिति में जीवित रहने के लिए लड़ रहे हैं, न कि उनके निर्माण के लिए। फिल्म में पानी की किल्लत और पानी न बरसने के कारण गांव में आने वाली आपदाओं को बहुत ही शानदार तरीके से पेश किया गया है।

प्राकृतिक आपदाओं से शुरू हुई खबरों ने अंत तक उन्हीं समस्याओं को बारीकी से दर्शाया है। फिल्म में दिखाया गया है कि कोई बाढ़, तो कोई सूखे से परेशान है। इसमें एक्टर संजय मिश्रा पानी किल्लत के कारण तरस रहे हैं, तो वहीं रणवीर शौरी समुद्र के किनारे बसे होने के कारण बाढ़ रूपी कहर से परेशान हैं। फिल्म में तिलोत्तमा सोम और भूपेश सिंह भी शामिल हैं।

‘कड़वी हवा’ के निर्देशक नीला माधब पांडा कहते हैं, “हमने इस फिल्म को पारिस्थितिकी के अनुकूल बनाने की हरसंभव कोशिश की है, क्योंकि हम सबके ऊपर इस ग्रह की जिम्मेदारी है। ऐसे में हम सबको इस भावना का संदेश प्रसारित करने की जरूरत है कि जलवायु परिवर्तन वास्तविक है, भले ही दुनिया के कुछ नेताओं को लगता हो कि यह एक धोखा, भ्रम और छलावा है।” संजय मिश्रा ने अनूठे तरीके से अपने विचार रखते हुए कहा, “मुझे इस तरह के सिनेमा के साथ खुद को जोड़ना बहुत रोमांचित करता है और ऐसी फिल्मों का हिस्सा बनकर खुद को भाग्यशाली भी मानता हूं। यह फिल्म हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि अब तक जलवायु परिवर्तन से परिचय कराने वाली कोई फिल्म नहीं बनी है। वैश्विक विषय को प्रकट करने वाली यह पहली फिल्म है। मुझे लगता है कि जीवन के हर क्षेत्र में जलवायु एवं जलवायु समस्या को कम से कम प्राथमिकता मिलती है। इसलिए मैं शहर को स्मार्ट बनाने से पहले कहूंगा कि पहले नागरिकों को चतुर बनाओ। फिल्म में उनकी भूमिका के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा, “लीड रोल होने के नाते एक बड़ी जिम्मेदारी है। यदि यह फिल्म भविष्य में अच्छा व्यवसाय करती है तो मुझे इस परियोजना का प्रमुख अंग होने पर कहीं अधिक आभारी महसूस होगा।”

दूसरी तरफ, रणवीर शौरी भी फिल्म के बारे में आश्वस्त और उत्साहित लग रहे थे। उन्होंने कहा, “हर चरित्र को अपनी तैयारी की जरूरत है, चाहे वह एक गंभीर भूमिका हो या हास्य भूमिका। फिल्म में मैंने भी अपने खास किरदार के लिए अलग से तैयारी की थी। हमारे लिए मुख्य कठिनाई यह थी कि हमने इस फिल्म को जून-जुलाई के महीने में राजस्थान के धौलपुर में शूट किया था। मुझे पूरी उम्मीद है कि लोग इस फिल्म को प्यार करेंगे। जबकि, तिलोत्तमा ने कहा, “फिल्म में मेरा किरदार सरल है, वह चुपचाप जलवायु परिवर्तन को देखती है। मुझे इस तरह की अवधारणा वाली फिल्म का एक हिस्सा बनने पर गर्व है और साथ ही प्रतिभावान कलाकारों के साथ काम करना भी गारवान्वित करता है।”