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नई दिल्ली : गोरखपुर और फूलपुर में औंधे मुंह गिरने के बाद मुख्यमंत्री आदित्यनाथ के साथ-साथ प्रधानमंत्री मोदी के लिए भी कैराना अब नाम का सवाल हो गया है। भाजपा के पिछले दावों के खोखले साबित होने के बाद यह कयास लगाया जा रहा है कि पार्टी के पूर्व सांसद हुकुम सिंह के निधन के बाद खाली हुई कैराना लोकसभा सीट को किसी भी कीमत पर भाजपा खोना नहीं चाहती है। मृगांका सिंह को भाजपा ने एक मजबूत दावेदार की तरह चुनावी मैदान में उतारा है। लेकिन उनको टक्कर देने वाली विपक्ष की साझा उम्मीदवार तबस्सुम हसन को भी एक मजबूत प्रत्याशी के तौर पर देखा जा रहा है। इसमें कोई शक नहीं कई कि कैराना का की जंग नाक की लडाई साबित होगी। आज कैराना के मतदाता अपने-अपने पसंदीदा उम्मीदवार के पक्ष में मतदान कर रहे हैं। गोरखपुर और फूलपुर में विपक्षी एकता ने यह साबित कर दिया है कि भाजपा के दुर्ग को धरासायी किया जा सकता है। इसको देखते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ और डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य दोबारा अपनी किरकिरी कैराना में नहीं हो, इसलिए अपना पूरा दमखम लगा रहे हैं। भाजपा का दावा है कि कैराना में विपक्षी एकता को ध्यान में रखते हुए ही पार्टी ने अपनी रणनीति तैयार की है और हल हाल में पार्टी को जीत हासिल होगी। अभी तक इस सीट से भाजपा के ही हुकुम सिंह सांसद थे और क्षेत्र में उनकी अच्छी-खासी धमक थी।अब हुकुम सिंह के निधन के बाद पार्टी ने उनकी बेटी मृगांका सिंह को मैदान में उतारा है।पार्टी की मंशा है कि मृगांका सिंह के जरिये कैराना में भाजपा के पारंपरिक वोटरों को जोड़े रखा जाए। कैराना पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में से एक है। यहां काफी संख्या में किसान हैं। ऐसे में इन चुनावों से यह भी साफ होगा कि किसान भाजपा के साथ है या नहीं। कैराना के उपचुनाव को 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले का सेमीफाइनल भी कहा जा रहा है। अगर विपक्षी एकता ने इस उप-चुनाव में भी भाजपा को पटखनी दे दी, तो इसको भविष्य का संकेत माना जा सकता है।

बहरहाल, आज मतदाता लाइन में खड़े हैं और जनादेश ईवीएम में दर्ज हो रहा है। अब फैसला तो मतगणना के बाद ही होगा कि भाजपा जीत हासिल करती है या एक बार फिर उनकी नाक कटती है।

इस बीच न्यूज एजेंसी एएनआई ने ट्वीट कर इस ख़बर की पुष्टि की है कि कैराना में बड़े पैमाने पर ईवीएम और वीवीपैट मशीनों में गड़बड़ी की शिकायत के संबंध में आरएलडी प्रत्याशी तबस्सुम हसन ने चुनाव आयोग को पत्र भेजकर आपत्ति दर्ज करवाई है।