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करगिल विजय दिवस पर विशेष

कारगिल एक ऐसा नाम है जो हर भारतीय को आज से 19 साल पहले हुए भारत – पाकिस्तान युद्ध की याद दिला देता है। इस युद्ध में 527 से अधिक भारतीय सैनिक शहीद हो गये थे और लगभग 1300 से ज्यादा जांबाज भारतीय सैनिक घायल हुए थे। यह एक ऐसा युद्ध था जिसमें शहीद होने वाले भारत माँ के अधिकाँश वीर सपूतों की उम्र 30 साल से कम थी ।

कारगिल युद्ध कई मायनों में देश के लिए महत्वपूर्ण साबित हुआ। इस युद्ध से जहां भारत-पाकिस्तान के बीच संबंधों में निर्णायक मोड़ आया। सबसे बड़ा सबक तो भारत को यह मिला कि पाकिस्तान कभी भी भारत की पीठ में छूरा भोंक सकता है। पाकिस्तानी सेना की भारतीय सीमा में घुसपैठ की जानकारी सबसे पहले गरेड़ियों  ने दी। 3 मई 1999 को कारगिल में युद्ध आरंभ हुआ जो लगातार बिना किसी संघर्ष विराम के 26 जुलाई 1999 तक चलता रहा। कारगिल की लड़ाई में इस युद्ध में पाकिस्तान भारत के मुकाबले बहुत ही ऊँचे और बेहद सुरक्षित जगह से लड़ रहा था। सारी भौगिलोक परिस्थितियाँ भारत के प्रतिकूल थीं लेकिन भारतीय वायुसेना तथा बोफोर्स तोपों ने भारत को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी। एक ओर इस युद्ध ने एक बार फिर से भारतीय सेना के साहस, युद्धकौशल तथा आत्मविश्वास को बढाया लेकिन वहीं दूसरी ओर 527 जांबाज सैन्य अधिकारीयों और वीर सैनिकों का बलिदान देकर भारत को इस युद्ध की बड़ी कीमत चुकानी पड़ी थी।

बड़ी संख्या में पाकिस्तानी सैनिकों व पाक समर्थित आतंकवादियों का लाइन ऑफ कंट्रोल यानी भारत-पाकिस्तान की वास्तविक नियंत्रण रेखा के भीतर प्रवेश कर कई महत्वपूर्ण पहाड़ी चोटियों पर कब्जा कर लेने से शुरू हुआ यह युद्ध भारत की जीत के साथ खत्म हुआ।

ऑपरेशन विजय में देश के सैकड़ों वीर सपूतों ने अपने प्राणों की परवाह किये बिना देश की आन-बान और शान के खातिर अपने प्राण न्यौछावर कर दिए थे। इन अमर शहीदों के बलिदान की याद में द्रास गांव में कारगिल युद्ध स्मारक का निर्माण किया गया।

भारतीय सेना द्वारा बनाया गया कारगिल युद्ध स्मारक, द्रास वार मेमोरियल या विजय पथ के नाम से भी जाना जाता है। कारगिल युद्ध में शहीद हुए वीर सैनिकों की याद में यह स्मारक जम्मू-कश्मीर के द्रास और कारगिल के बीच में बनाया गया है। इस स्मारक में कारगिल के सभी शहीदों के नाम शिलापट्ट पर लिखे हैं। उनकी शहादत को सलाम करते हुए एक विशालकाय तिरंगा ध्वज हमेशा यहाँ लहराता रहता है। इस स्मारक को तोलोलिंग पहाड़ी के नीचे बनाया गया है जो टाइगर हिल्स से सिर्फ 5 किलोमीटर की दूरी पर है। इस स्मारक को यहाँ बनाने का एक मक्सद यह भी रहा होगा कि तोलोलिंग और टाइगर हिल दोनों पहाड़ की वो उच्चतम उचाई वाली चोटियाँ हैं जिन पर पाकिस्तान ने कब्जा कर लिया था, जिसे भारतीय वीर सैनिकों ने अपनी जान की बाजी लगाकर वापस पाकिस्तान से छीन लिया। टाइगर हिल पर विजय का जश्न मनाते हुए भारतीय जवानों की तस्वीर भारत के इतिहास का स्वर्णिम हिस्सा बन गयी।

(6 जुलाई को कारगिल विजय दिवस पर द्रास स्थित कारगिल युद्ध स्मारक में शहीदों के परिजन और नागरिक बड़ी संख्या में देश के वीर सपूतों को नमन करने पहुँचते हैं)

श्रीनगर से लेह को जोड़ने वाले कारगिल हाईवे पर बने इस स्मारक को कश्मीर आने वाले हर भारतीय को देखने की इच्छा होती है। हर साल 26 जुलाई को इस युद्ध स्मारक में कारगिल विजय दिवस का समारोह होता है।