Print Friendly, PDF & Email

चुनाव आते ही कोई न कोई विवाद होना इस देश की सियासी परंपरा बन गई है। पहले ईवीएम मशीनों को लेकर काफी घमासान हुआ था और अब फर्जी वोटर आईडी कार्ड को लेकर कर्नाटक चुनावों के पहले कांग्रेस और भाजपा एक दूसरे पर आरोप लगाकर मामले को अपने पक्ष में भुनाने के प्रयास में हैं।

क्या है सारा माजरा, आइये जानते हैं। दरअसल कर्नाटक विधानसभा चुनाव से ऐन पहले बेंगलुरु के एक फ्लैट से बड़ी संख्या में ‘फर्जी’ वोटर आईडी कार्ड मिले हैं। कर्णाटक में यह मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। इस बाबत बीजेपी और कांग्रेस ने इस मामले में एक-दूसरे के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बीजेपी जहां सिद्धारमैया के नेतृत्व वाली कर्नाटक सरकार को घेरने की कोशिश कर रही है, वहीं अब कांग्रेस ने बीजेपी पर पलटवार करते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं।

कांग्रेस का दावा है कि जिस फ्लैट में वोटर आईडी कार्ड मिले हैं उसकी मालकिन मंजुला नंजामुरी बीजेपी की पूर्व निगम पार्षद हैं और उन्होंने अपने गोद लिए बेटे राकेश को इसे किराए पर दे रखा है। कांग्रेस अब इस मसले को चुनाव आयोग के सामने उठाने वाली है। पार्टी नेता सुबह 10 बजे चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज करवाएंगे।

गौरतलब है कि विधानसभा चुनाव से दिन पहले मिले इन वोटर आईडी कार्ड का बवाल इतना बढ़ा राज्य चुनाव आयोग को आधी रात को प्रेस कॉन्फ्रेंस करनी पड़ी। मुख्य चुनाव अधिकारी ने फ्लैट से जब्त 9,746 वोटर आईडी के बारे में जानकारी दी।

और ठीक उसी वक्त बीजेपी नेता प्रकाश जावड़ेकर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कांग्रेस पर कई आरोप लगाए और आर.आर. नगर सीट पर चुनाव रद्द कराने की मांग की। इसके कुछ देर बाद ही दिल्ली में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रणदीप सुरजेवाला ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बीजेपी को ही कटघरे में घेरा। इस दौरान उन्होंने उस फ्लैट का विडियो भी दिखाया जिसमें वोटर आईडी कार्ड जब्त किए गए थे और बताने की कोशिश की कि किस तरह इसमें बीजेपी के ही लोग शामिल हैं।

आपको बता दें कि कर्नाटक के मुख्य चुनाव अधिकारी संजीव कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि शुरुआती जांच में ये वोटर आईडी कार्ड फर्जी नहीं दिख रहे हैं। हालांकि पूरी जांच के बाद ही तस्वीर साफ हो पाएगी। बता दें कि  बेंगलुरु के जलाहल्ली इलाके ‘फर्जी’ वोटर आईकार्ड मिलने के बाद बीजेपी नेता सदानंद गौड़ा ने इसके पीछे आर.आर. नगर से कांग्रेस उम्मीदवार मुनीरत्ना नायडू का हाथ बताया था। बीजेपी ने इस सीट पर चुनाव रद्द कराने की भी मांग की है।

बहरहाल इस पूरे मामले में भले ही कोई एक सियासी पार्टी दोषी हो लेकिन जनता तक सच्चाई का पहुँचना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन लग रहा है। यह पूरा प्रकरण चुनावी स्टंट बनकर रह जाएगा या दोषी हाथ आएंगे, यह तो समय ही बताएगा।