(प्रतीकात्मक तस्वीर)
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74-EVM_5चुनाव आयोग ने बताया है कि “पंजाब विधानसभा चुनावों में करीब 1.08 लाख लोगों ने नोटा यानी किसी भी उम्मीदवार को वोट नहीं का बटन दबाया है। अन्य राज्यों में यूपी में सबसे ज्यादा 7.58 लाख लोगों ने नोटा का बटन दबाया। वहीं गोवा में 1.09 लाख लोगों को कोई उम्मीदवार पसंद नहीं आया। उत्तराखंड में 50,408 और मणिपुर में 9,062 लोगों ने नोटा को चुना।”

इससे पिछले चुनाव में जब नियम 49-o के तहत लोगों को यह अधिकार दिया गया था कि वह किसी को भी वोट न दें तो पंजाब में 439 लोगों ने नोटा का बटन दबाया था। इतनी तादाद में लोगों ने नोटा के लिए वोट शायद इसलिए किया क्योंकि ईवीएम में पहली बार नोटा का अॉप्शन लाया गया और साथ ही उसका अपना एक निशान भी लाया गया। इस साल सबसे ज्यादा सुनम में 1718 मतदाताओं ने नोटा के पक्ष में वोट किया है।

इसके बाद खेमकरन (1484) और जालंधर कैंट (1455) का नंबर रहा। एेसी करीब 38 सीटें रहीं, जहां 1 हजार से ज्यादा मतदाताओं ने नोटा का बटन दबाया। कांग्रेस के परगट सिंह ने जालंधर कैंट से जीत दर्ज की। उन्होंने अकाली दल के उम्मीदवार सर्बजीत सिंह मक्कर और आप के हरकिशन सिंह मक्कर को हराया। वहीं सुनम में आप के अमन अरोड़ा ने अकाली के गोविंद सिंह लोंगेवाल और कांग्रेस के दामन ठिंड बाजवा को मात दी।

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कांग्रेस के सुखपाल सिंह भुल्लर को खेमकरन से 19,602 वोटों से जीत मिली। जब मतदाताओं की संख्या से इसकी तुलना की गई तो गोवा में सबसे ज्यादा 2.2 प्रतिशत नोटा वोटर्स थे। इसके बाद उत्तराखंड में 1 प्रतिशत, यूपी में 0.9 प्रतिशत, पंजाब में 0.7 प्रतिशत और मणिपुर में 0.5 प्रतिशत नोटा के वोटर्स थे। आपको बता दें कि उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में बीजेपी ने एेतिहासिक जीत हासिल की है। यूपी में बीजेपी ने 300 से ज्यादा वोट हासिल किए हैं। वहीं मणिपुर और गोवा में किसी पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं मिला है। इसलिए अब दोनों पार्टियां सरकार बनाने की जुगत में लगी हुई हैं। गोवा में कांग्रेस को 17 और बीजेपी को 13 सीटें मिली थीं। गोवा की स्थानीय पार्टियों ने बीजेपी को समर्थन करने का एेलान किया है।