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नई दिल्ली
नागपुर में डीआरडीओ के प्रोजेक्ट ब्रह्मोस मिसाइल यूनिट में कार्यरत एक युवा वैज्ञानिक इंजीनियर को जासूसी के आरोप में सोमवार को गिरफ्तार किया गया। आतंकवाद रोधी दस्ते(एटीएस) के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के एटीएस के एक संयुक्त अभियान में ब्रह्मोस के वर्धा रोड केंद्र से निशांत अग्रवाल को गिर‍फ्तार किया गया। सूत्रों ने बताया कि निशांत को ट्रांजिट रिमांड पर लखनऊ लाया जाएगा।

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एटीएस सूत्रों ने बताया कि निशांत के नागपुर स्थित घर से एक कंप्यूटर जब्त किया गया जिसमें गोपनीय दस्तावेज पाए गए। उन्होंने कहा कि इस तरह के दस्तावेज किसी के निजी कंप्यूटर में नहीं होने चाहिए। सूत्रों ने बताया कि निशांत के गृह नगर रुड़की स्थित उसके घर से भी उसका एक पुराना कंप्यूटर जब्त किया गया है और उसमें मिली चीजों की जांच की जा रही है।

जानकारी के मुताबिक, निशांत अग्रवाल उत्तराखंड का रहने वाला है। वह डीआरडीओ के ब्रह्मोस एयरोस्पेस में चार साल से सीनियर सिस्टम इंजीनियर की जिम्मेदारी देख रहा था। इसके तहत वह हाइड्रोलिक-न्यूमेटिक्स और वारहेड इंटीग्रेशन (प्रोडक्शन डिपार्टमेंट) की टीम को लीड कर रहा था। इस टीम में 40 लोग थे।

निशांत वर्धा रोड में पिछले साल से किराये पर रह रहा था। निशांत के मकान मालिक मनोहर काले ने बताया कि वह वर्धा रोड स्थित उनके घर में पिछले साल से किराये पर रह रहा था। काले ने बताया कि पुलिस टीम सुबह साढ़े पांच बजे इमारत में पहुंची और शाम पांच बजे तक वहां रही। उन्होंने बताया कि अग्रवाल रुड़की का रहने वाला था और दो महीने पहले ही उसकी शादी हुई थी। उन्होंने कहा, ‘‘वह यहां पत्नी के साथ रह रहा था और उसने यहां आने पर मुझे अपने आधार कार्ड की प्रति और अपने नियोक्ता का एक प्रमाणपत्र दिया था।’’

ब्रह्मोस एयरोस्पेस का गठन भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और रूस के ‘मिलिट्री इन्डस्ट्रीयल कंसोर्टियम'(एनपीओ मशिनोस्त्रोयेनिया) के बीच संयुक्त उद्यम के रूप में किया गया है। भारत और रूस के बीच 12 फरवरी, 1998 को हुए एक अंतर-सरकारी समझौते के माध्यम से यह कंपनी स्थापित की गई थी।

गेम के चैट जोन से लीक करता था ब्रह्मोस की डिटेल

यूपी एटीएस फेसबुक पर पाकिस्तान से महिलाओं की नकली आईडी बनाने और भारत में संवेदनशील स्थानों पर काम कर रहे लोगों को फंसाने की कार्यप्रणाली सामने आने के बाद से इस पर निगाह रख रही थी। अंग्रेजी अखबार ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की खबर के मुताबिक बताया जा रहा है कि इंजीनियर निशांत अग्रवाल अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए की एक महिला एजेंट के जाल में फंसा था। इसलिए इसे हनीट्रैप से जोड़कर देखा जा रहा है। महिला हैंडलर उसे दिल्ली से ऑपरेट कर रही थी। फिलहाल वो महिला कौन है और वो कब से निशांत के संपर्क में थी, इस बारे में अभी कोई ज्यादा जानकारी नहीं मिल पाई है। सुरक्षा एजेंसियां आरोपी इंजीनियर से पूछताछ कर रही है।

‘इंडियन एक्सप्रेस’ और ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपी निशांत अग्रवाल पिछले एक साल से अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए और पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के पैरोल पर काम कर रहा था। उसे एक नहीं, बल्कि देश की कई खुफिया एजेंसियों ने अपने रडार पर रखा था।

बताया जा रहा है कि आरोपी इंजीनियर सोशल मीडिया के जरिये बड़े आराम से ब्रह्मोस मिसाइल की जानकरियां लीक कर रहा था। इसके लिए वह इन्क्रिप्टेड, कोडवर्ड और गेम के चैट जोन का इस्तेमाल कर रहा था। महिला हैंडलर के साथ फेक फीमेल आईडी से बात करता था।

ऐसी खबर है कि इस इंजीनियर से पहले एटीएस ने कानपुर से एक महिला को भी गिरफ्तार किया। हालांकि, इस महिला के पास कुछ नहीं मिला था। कानपुर की महिला का आरोपी इंजीनियर से कोई कनेक्शन है या नहीं, इस बारे में पता लगाया जा रहा है।

लैपटॉप व अन्य सामान जब्त
दुश्मन देश पाकिस्तान को ब्रह्मोस संबंधी तकनीकी के साथ अन्य खुफिया जानकारी देने के आरोप में नागपुर में गिरफ्तार हुए रुड़की निवासी निशांत अग्रवाल के घर पर आतंक निरोधी दस्ते (एटीएस) ने छापेमारी कर एक लैपटॉप व अन्य सामान कब्जे में ले लिया।

सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली
साथ ही रेलवे स्टेशन रोड पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालते हुए उनको भी अपने कब्जे में ले लिया। निशांत के बारे में जानकारी जुटाने के बाद एटीएस की टीम लौट गई। उधर, जासूसी के आरोप में निशांत के पकड़े जाने से उसके पिता डॉ। प्रदीप अग्रवाल समेत रिश्तेदार और पड़ोसी भी सन्न रह गए। लखनऊ से आई आतंक निरोधी दस्ते(एटीएस) की टीम ने निशांत अग्रवाल के घर से लैपटॉप और अन्य सामान अपने साथ ले गई है। स्थानीय पुलिस भी इस मामले पर पूरी नजर बनाए हुए हैं। -मणिकांत मिश्रा, एसपी देहात

आइजी का दावा है कि निशांत के निजी लैपटॉप व कंप्यूटर की जांच में अतिसंवेदनशील दस्तावेज मिले हैं। निशांत के दो ऐसी फेसबुक आइडी से चैटिंग करने के प्रमाण मिले हैं, जिनके आइपी एड्रेस व नंबर पाकिस्तान के हैं। दोनों आइडी महिलाओं के छद्म नाम पर हैं और उनकी प्रोफाइल में तस्वीरें भी अलग-अलग महिला की हैं। निशांत पर पिछले काफी दिनों से एटीएस को शक था, लेकिन बात कुछ पुख्ता होने के बाद आज उसको गिरफ्तार कर लिया। उसे ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट के तहत पकड़ा गया है।

रुड़की से बरामद किया दूसरा लैपटॉप
आइजी ने बताया कि एटीएस की टीम ने उत्तराखंड पुलिस की मदद से रुड़की स्थित निशांत अग्रवाल के घर से उसका एक पुराना लैपटॉप भी बरामद किया है। उसका भी परीक्षण कराया जा रहा है।

मिला था यंग साइंटिस्ट अवार्ड
बताया गया कि निशांत अग्रवाल को वर्ष 2017-18 में यंग साइंटिस्ट अवार्ड मिला था। इससे पूर्व वह मुंबई स्थित एक ऑयल कार्पोरेशन में काम करता था। फेक आइडी के जरिये निशांत को नौकरी का झांसा देकर अपने जाल में फंसाया गया था।

पाकिस्तान बेस्ड महिला की फेक फ़ेसबुक आईडी
इंजीनियर निशांत पाकिस्तान बेस्ड महिला की फेक फ़ेसबुक आईडी के जरिये आईएसआई के जाल में फंसा।
इससे पूर्व में गिरफ्तार सीमा सुरक्षा बल के एक सिपाही से संबंधित जांच में दो और फेसबुक आईडी का पता चला था, जो महिलाओं के नकली नाम से बनाई गई थीं और पाकिस्तान से उनका संचालन किया जा रहा था। निशांत के उन आईडी से चैट किए जाने के सुबूत मिले थे।