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42101536023856399879410000037961016411070241017019-1466586623मध्य प्रदेश प्रगतिशील लेखक संघ से 11 लेखकों का एक प्रतिनिधिमंडल 14 से 20 फरवरी, 2017 तक महाराष्ट्र में सतारा और कोल्हापुर, गोवा तथा कर्नाटक में धारवाड़ का दौरा करने निकला है। इस यात्रा का उद्देश्य अपने पड़ोसी राज्यों के अन्य भाषाओँ के लेखकों से संपर्क प्रगाढ़ करना तो है ही| साथ ही पिछले कुछ वर्षों में अपने तार्किक-वैज्ञानिक और साहसिक लेखन के लिए शहीद हुए डॉ. नरेन्द्र दाभोलकर, कॉमरेड गोविन्द पानसरे और प्रोफेसर एम. एम. कलबुर्गी की शहादत के प्रति अपना सम्मान और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के संघर्ष के लिए अपना संकल्प प्रकट करना भी है।

प्रतिनिधिमंडल में मध्य प्रदेश प्रगतिशील लेखक संघ के अध्यक्ष और ‘समकालीन वसुधा’ पत्रिका के संपादक श्री राजेन्द्र शर्मा (कवि) तथा महासचिव श्री विनीत तिवारी (कवि-नाटककार और डाक्यूमेंट्री फिल्म निर्माता) के साथ अध्यक्ष मंडल के सदस्य सर्व श्री हरिओम राजोरिया (कवि-नाटककार), प्रान्तीय सचिव मंडल सदस्य और वरिष्ठ कवि श्री बाबूलाल दाहिया, श्री शिवशंकर मिश्र सरस, तरुण गुहा नियोगी, सुश्री सुसंस्कृति परिहार, वरिष्ठ लेखक और पत्रकार श्री हरनाम सिंह, कहानीकार श्री दिनेश भट्ट, नाट्य निर्देशिका और अभिनेत्री सुश्री सीमा राजोरिया, तथा ‘समय के साखी’ पत्रिका की संपादक और कवयित्री सुश्री आरती शामिल हैं। ये लेखक प्रदेश के भोपाल, इंदौर, अशोकनगर, मंदसौर, सतना, सीधी, जबलपुर, छिंदवाड़ा और दमोह शहरों से हैं।

लेखकों और संस्कृतिकर्मियों का ये प्रतिनिधिमंडल 14 फरवरी को एफटीआईआई का भी भ्रमण करेगा और पुणे के साहित्यिक समुदाय से भी भेंट करेगा। हिंदी के ये लेखक 15 फरवरी को सतारा में डॉ. नरेंद्र दाभोलकर के परिजनों तथा अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के कार्यकर्ताओं से भेंट कर आंदोलन के साथ अपनी एकजुटता ज़ाहिर करेंगे।

16 और 17 फरवरी को गोवा के लेखकों और स्थानीय समुदायों के साथ अंतरसंवाद करेंगे और 18 फरवरी को प्रोफेसर एम. एम. कलबुर्गी के परिजनों से धारवाड़ में मुलाक़ात होगी। इसी समय कन्नड़ भाषा के प्रसिद्ध लेखकों तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध विद्वान् साहित्यकार प्रोफेसर गणेश देवी से तथा जनांदोलनकारी एस. आर. हिरेमठ से भी मुलाक़ात करेंगे। 20 फरवरी को यात्रा के अंतिम दिन ये लेखक कोल्हापुर में कॉमरेड गोविन्द पानसरे की स्मृति में आयोजित सभा में शरीक होंगे और देश दुनिया में लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए अपना संकल्प दोहराएंगे और यात्रा को विराम देंगे।

ये यात्रा हिंदी के लेखकों को अन्य भाषा के साहित्यकारों से जोड़ने, उनकी साहित्यिक, सामाजिक और राजनीतिक चिंताओं और चुनौतियों को जानने, कथ्य और शैली में किये जा रहे नए प्रयोगों को समझने और अपने लेखन को संवर्धित करने में उपयोगी होगी और भिन्न भाषाओँ के लेखकों को आपस में जोड़ेगी।