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मालदीव के घरेलू हाल बिगड़ते ही जा रहे हैं। यहां का राजनीतिक संकट भी इस कदर बढ़ रहा है कि एक बार फिर से उसके सामने आपातकाल का संकट खड़ा हो गया है। इतना ही नहीं यह आपातकाल अब करीब 30 दिन का होगा।

यानी पूरा एक महीना यह देश इमरजेंसी के हालातों का सामना करेगा। दरसअल सियासी संकट से जूझ रहे मालदीव की परेशानियां खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं।

इतने दिनों आपातकाल के साए में बिताने के बाद अब वहां के लोगों के लिए एक और बुरी खबर आई है। पहले से लगे आपातकाल को सरकार ने 30 और दिनों के लिए बढ़ा दिया है।

यह फैसला संसदीय कमेटी ने राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन की गुजारिश पर किया है। इससे यमीन की ताकत और बढ़ती नजर आ रही है।

मीटिंग बंद दरवाजों के पीछे हुई थी। इसमें मौजूद 38 सांसदों ने आपातकाल का समर्थन किया। इसके बाद नैशनल सिक्यॉरिटी कमेटी को इसका पालन करने के लिए कह दिया गया।

इस मीटिंग में विपक्षी दल का कोई सांसद शामिल नहीं हुआ था। उन्होंने मीटिंग का विरोध करते हुए इसे असंवैधानिक बताया था।

बता दें कि मालदीव के राष्ट्रपति ने पांच फरवरी को आपातकाल लगाया था। उन्होंने यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के आदेश के विरोध में सुनाया था।

उस आदेश में विपक्षी दलों के कुछ नेताओं को छोड़ने को कहा गया था। वे लोग काफी लंबे वक्त से ट्रायल पर हैं।

अब देखना होगा कि आपातकाल के इस दौर में जनता कितनी बागी होती है और सियासत का रुख किस करवट बदलता है।