प्रतीकात्मक चित्र
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हाथरस, उत्तर प्रदेश
सांसद राजेश कुमार दिवाकर ने लोकसभा में श्रम एवं रोजगार मंत्रालय से श्रम कानूनों से सम्बन्धित जानकारी मांगी। सांसद ने पूछा है कि शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा, महिला विकास के क्षेत्र में कार्यरत देश में स्थित निजी और विदेशी कंपनियों, फर्मों, उद्योगों द्वारा अनुपालन किये जा रहे प्रचलित वर्तमान श्रम कानून, मानदण्ड, दिशा-निर्देश, नियम क्या हैं और क्या सरकार इस बात से अवगत है कि हाल ही में मुम्बई स्थित एक कंपनी तथा दिल्ली में सेवा में आने के चार या पाॅच दिन पहले सहित कई कंपनियों ने देश के विभिन्न महाविद्यालयों के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को की गई रोजगार की पेशकश को वापस लेकर मानदण्डों/अनुबंध का उल्लंघन किया है।

क्या सरकार ने इस बात पर गंभीर रूप से ध्यान दिया है कि इसके परिणाम स्वरूप विद्यार्थियों के शैक्षिक और करियर सम्बन्धी अवसर ठहर गये हैं और दांव पर हैं। क्या उन्हें प्रभावित विद्यार्थियों को क्षतिपूर्ति करने का निर्देश दिया गया है।
जानकारी देते हुऐ श्रम एवं रोजगार मंत्रालय में राज्य मंत्री संतोष कुमार गंगवार ने बताया कि भारतीय संविधान के अन्तर्गत श्रम समवर्ती सूची में आता है और राज्य सरकारें विधानों के अधिनियम के लिये सक्षम हैं।

श्रम एवं रोजगार मंत्रालय को कामगारों के हितों का संरक्षण एवं संरक्षा करने, उच्च उत्पादन एवं उत्पादकता के लिये स्वस्थ कार्य वातावरण के निर्माण और 40 केन्द्रीय विधानों के माध्यम से जो न्यूनतम मजदूरी के मामले, दुर्घटना तथा सामाजिक सुरक्षा लाभों, व्यवसायिक सुरक्षा एवं लाभ, कार्य की दशाऐं, अनुशासिक कार्यवाही, ट्रेड यूनियनों का गठन, औद्योगिक सम्बन्ध इत्यादि से सम्बन्धित है, उदारीकरण की प्रक्रिया के समनुरूप श्रम बल को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने का अधिदेश प्राप्त है।

कामगारों के हितों का संरक्षण करने के उद्देश्य से मुख्य श्रमायुक्त(केन्द्रीय) का कार्यालय केन्द्रीय क्षेत्र के अन्तर्गत आने वाले प्रतिष्ठानों के सम्बन्ध में विभिन्न श्रम कानूनों के अन्तर्गत समय-समय पर अपने क्षेत्रीय कार्यालयों के माध्यम से निरीक्षण कराता है, ताकि सांविधिक उपबन्धों को कार्यान्वित किया जा सके। उक्त विधानों के किसी प्रकार के उल्लंघन के मामले में विधि के अनुसार कानूनी कार्यवाही आरम्भ की जाती है। मुम्बई की किसी कंपनी के सम्बन्ध में मुख्य श्रमायुक्त (केन्द्रीय) कार्यालय को ऐसी कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई है।