फाइल फोटो
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रांची, झारखण्ड
राज्यसभा सांसद महेश पोद्दार ने मुख्यमंत्री रघुवर दास को पत्र लिखकर राज्य में ट्रैफिकिंग से मुक्त कराये गए, अनाथ, लावारिस तथा बाल श्रम से मुक्त कराये गए बालकों/बालिकाओं के संरक्षण व पुनर्वास का दायित्व महिला स्वयं सहायता समूहों/सखी मंडलों को सौंपने का सुझाव दिया है।
मुख्यमंत्री को संबोधित पत्र में महेश पोद्दार ने कहा है कि राज्य से बालकों/बालिकाओं का असुरक्षित पलायन या ट्रैफिकिंग राज्य की वर्तमान सरकार को विरासत में मिली हुई समस्या है। राज्य सरकार न सिर्फ ट्रैफिकिंग की शिकार बालिकाओं की मुक्ति का उपक्रम कर रही है बल्कि मुक्त कराई गयी बालिकाओं के पुनर्वास का भी पूरा इंतजाम किया गया है। वर्तमान व्यवस्था के तहत मुक्त कराई गयी बालिकाओं के पुनर्वास के लिए राज्य में कई बालाश्रय, किशोरी निकेतन आदि संचालित हैं और इनमें से अधिकांश की जिम्मेवारी गैर सरकारी स्वयंसेवी संस्थाओं को दी गयी है। अनाथ, लावारिस बच्चों, बाल श्रम से मुक्त कराये गए बच्चों के पुनर्वास के लिए भी यही व्यवस्था है।

हाल के दिनों में कुछ ऐसी घटनाएं हुई हैं जिनकी वजह से इस प्रकार की गैर सरकारी स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रति लोगों में अविश्वास का भाव उत्पन्न हुआ है। पूर्व में भी इस प्रकार की संस्थाओं के बारे में कई ऐसी ख़बरें आती रही हैं जो इनकी कार्यप्रणाली को संदेहास्पद बनाती हैं और हमारी चिंता बढ़ाती हैं। इन संस्थाओं को केंद्र और राज्य सरकार की ओर से लाखों – करोड़ों का अनुदान मिलता है और इस राशि के व्यय की सम्यक तरीके से जांच नहीं होती, अंकेक्षण भी नहीं होता। ऐसे में, इस प्रक्रिया में सरकारी राशि के दुरूपयोग की पूरी पूरी संभावना रहती है।

दूसरी तरफ, आज राज्य में हजारों महिला स्वयं सहायता समूह/सखी मंडल और उनके माध्यम से लाखों महिलायें विविध रोजगार परक गतिविधियों में संलग्न हैं, राज्य की अर्थव्यवस्था को गति दे रही हैं। राज्य सरकार के प्रयास से राज्य के महिला स्वयं सहायता समूह/सखी मंडल इतने सक्षम हो गए हैं कि वे इन पीड़ित बालक/बालिकाओं के संरक्षण एवं पुनर्वास का दायित्व ज्यादा बेहतर तरीके से वहन कर सकती हैं।सामूहिक नेतृत्व की वजह से स्वयं सहायता समूह/सखी मंडल के द्वारा आर्थिक अनियमितता की संभावना न्यूनतम रहेगी। इन समूहों की आर्थिक गतिविधियों के सम्यक अंकेक्षण की व्यवस्था कर पारदर्शी बनाना भी संभव है। सबसे बड़ी बात, सखी मंडलों/स्वयं सहायता समूहों में शामिल महिलायें भावनात्मक रूप से भी इन पीड़ित बालक/बालिकाओं से जुड़ी होंगी जिसकी अपेक्षा अब काफी हद तक कारोबारी संगठन का रूप ले चुके गैर सरकारी स्वयंसेवी संस्थाओं से नहीं की जा सकती।
पोस्टल कोड 834001