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सपा में तख्तापलट होने के बाद अब पार्टी के चुनाव चिन्ह की लड़ाई चुनाव आयोग में चाल रही है| चुनाव चिन्ह साइकल पर दावे को लेकर मुलायम सिंह यादव ने चुनाव आयोग में मुलाकात की।मुलाकात के बाद मुलायम सिंह यादव ने कहा कि “सिंबल का मामला चुनाव आयोग में है। इसका फैसला आयोग से ही होगा।”

मुलायम ने आगे कहा कि “हमारी पार्टी में थोड़ा बहुत ही मतभेद है। मेरे बेटे को कुछ लोगों ने बहका दिया है।”उन्होंने रामगोपाल की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि “बेटे से कोई विवाद नहीं है और हम मामला सुलझा लेंगे।” इस बीच मुलायम सिंह ने राज्य सभा के सभापति हामिद अंसारी को पत्र लिखकर रामगोपाल यादव से राज्यसभा में एसपी के नेता का दर्जा वापस लिए जाने की मांग की है। इसके अलावा उनकी सीट में भी एक निर्दलीय के तौर पर बदलाव करने को कहा गया है।

मुलायम सिंह यादव के साथ अमर सिंह और शिवपाल यादव भी चुनाव आयोग में मौजूद थे। इस बीच अखिलेश कैंप से रामगोपाल यादव और नरेश अग्रवाल भी चुनाव आयोग के दफ्तर पहुंच चुके हैं।

मुलायम सिंह यादव चुनाव आयोग में यह दलील दी है कि “रामगोपाल यादव ने 1 जनवरी को जो अधिवेशन बुलाया था, वह अवैध था। मुलायम गुट के मुताबिक रामगोपाल उस दौरान पार्टी से बर्खास्त थे| इसलिए उन्हें अधिवेशन बुलाने का अधिकार ही नहीं था। इसके अलावा मुलायम सिंह यादव की ओर से यह पार्टी संविधान का हवाला दिया गया कि अध्यक्ष की अनुमति के बिना अधिवेशन नहीं बुलाया जा सकता।”

25 साल पहले एसपी की स्थापना करने वाले मुलायम सिंह यादव के बेटे और यूपी के सीएम अखिलेश यादव ने आयोग से साइकल चुनाव चिह्न दिए जाने की मांग की है। अखिलेश ने पार्टी के 229 विधायकों में से 200 से अधिक विधायकों, 15 सांसदों और 5,000 से अधिक कार्यसमिति सदस्यों के समर्थन वाला पत्र आयोग को सौंपा है|

दोनों ही खेमों ने अपने-अपने प्रत्याशियों की सूची जारी कर दी है और अब पार्टी में दो-फाड़ के बाद पार्टी पर कब्जे की लड़ाई जारी है| लड़ाई चुनाव आयोग तक आ गई है| यहां दिल्ली में अखिलेश यादव खेमे ने अपनी ओर से चुनाव आयोग में दावा मजबूत करते हुए कागजात सौंप दिए हैं|

सूत्र के अनुसार, मुलायम सिंह यादव का पूरा दांव तकनीकि आधार पर है| मुलायम खेमे का कहना है कि “जब पार्टी महासचिव रामगोपाल यादव ने विशेष अधिवेशन का आयोजन किया था तब वह पार्टी से निष्कासित किए जा चुके थे| इसलिए यह पूरा अधिवेशन ही अवैध है|”

पार्टी कार्यकर्ताओं का कहना है कि “मुलायम सिंह यादव कई बार साफ कह चुके हैं कि अखिलेश उनके बेटे हैं और वह ज्यादा कुछ नहीं कर सकते|” लेकिन इन कार्यकर्ताओं का आरोप है कि “जैसे ही अमर सिंह मिलने आते हैं इनके सुर बदल जाते हैं|”