नवजात की मौत, परिजनों ने अस्पताल पर लगाया लापरवाही का आरोप

(तस्वीर : हिंद वॉच)
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ग्रासरूट रिपोर्टर धर्मेन्द्र पंडा की रिपोर्ट
सिमडेगा, झारखंड
जिले के सदर अस्पताल में समय पर एंबुलेंस नहीं मिलने के कारण एक नवजात बच्चे की मौत का मामला प्रकाश में आया है।  कुरकुरा निवासी  देव महली की पत्नी कतरीना महली गर्भवती थी। 9 सिंतबर को उसने बानो अस्पताल में एक शिशु को जन्म दिया। नवजात शिशु का जन्‍म पांचवें महीने में ही हो गया था। 9 सितंबर को ही नवजात को बानो से ला कर, सिमडेगा सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

10 सितंबर को दिन के 11 बजे उसकी हालत गंभीर हो गयी। चिकित्सकों ने नवजात को इलाज के लिये बाहर ले जाने की सलाह उसके परिजनों को दी। इसके बाद पिता देव महली सहित अन्य परिजन अस्पताल  में एंबुलेंस के लिये दौड़ते रहे।अस्पताल परिसर में उस समय दो एंबुलेंस खड़े थे किंतु पीड़ित परिवार को उसकी सेवा उपलब्ध नहीं करायी गयी। उसे 108 को फोन करने के लिये कहा गया।  फोन करने पर पता चला कि एक 108 एंबुलेंस में तेल नहीं है।

दूसरा 108 एंबुलेंस कुरडेग गया था जो आने के क्रम में पंचर हो गया। इसी क्रम में लगभग  तीन घंटे का वक्‍त गुजर गया। नवजात की हालत लगातार गंभीर होती चली गयी। चिकित्सकों  ने दिन के दो बजे के करीब नवजात को मृत घोषित कर दिया। बच्चे की मौत से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही ने ले ली जान
नवजात के पिता देव महली तथा माता कतरीना महली ने कहा कि एंबुलेंस के लिये  उन लोगों को लगभग तीन घंटे दौड़ाया गया। इसके बाद भी एंबुलेंस उपलब्ध नहीं कराया गया। वे लोग एंबुलेंस के लिये रूपये देने को भी तैयार थे किंतु इसके बावजूद  एंबुलेंस के लिए लमटोल किया जाता रहा। देव महली ने कहा कि अगर समय पर एंबुलेंस मिल जाता तो वे लोग बच्चे को इलाज के लिये कहीं दूसरी जगह ले जाते। इलाज होने पर बच्चा बच सकता था। उन्‍होंने बच्चे की मौत के लिए अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही को जिम्‍मेदार बताया है और दोषी लोगों पर कार्रवाई की मांग की है।

जिंदा रहते नहीं, मरने के बाद मिलती है एंबुलेंस
बच्चे को इलाज हेतू ले जाने के लिये एंबुलेंस नहीं मिला। एंबुलेंस के अभाव में बच्चे की मौत हो गयी। किंतु  बच्चे की मौत के मामले को दबाने तथा मामले को तत्काल रफा-दफा करने के लिये  अस्पताल द्वारा  बच्चे के शव को ले जाने के लिये परिजनों को एंबुलेंस उपलब्ध करा दिया गया।  कुछ लोग इस नजारे को देख कर कह रहे थे  कि जीवन बचाने के  लिये तो एंबुलेंस नहीं दिया किंतु शव ले जाने के लिये  एंबुलेंस फ्री में उपलब्ध करा दिया गया।

जांच में दोषी पाए गए लोगों पर होगी कार्रवाई – सिविल सर्जन
सिविल सर्जन प्रमोद कुमार सिन्हा ने कहा कि वे अपने स्तर से इस मामले की जांच करेंगे। जांच में दोषी पाये जाने पर सबंधित लोगों के विरूद्ध कार्रवाई की जायेगी। हालांकि उन्‍होंने कहा कि बच्चा पंच मासु था और उसका वजन सिर्फ 8 सौ ग्राम था। ऐसे में बच्चे के बचने की उम्मीद कम थी।
पोस्टल पिन कोड 835201 835211 835212 835223 835226 835228





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