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रांची, झारखंड
झारखंड की राजधानी रांची के प्रसिद्ध पहाड़ी मंदिर में महीनों से बंद पड़े दान पात्र के अंदर पानी घुस जाने से कई नोट सड़ चुके है और भक्तों के दान के पैसे किसी काम में नहीं आ रहे हैं। मंदिर परिसर में रखी गयी दान पेटियां भर चुकी है़ं  तीन दान पेटियां तो पूरी तरह से भर गयी हैं। पिछले चार महीने से दान पेटियां खुली नहीं हैं। मंदिर परिसर में ही करीब आठ लाख रुपये के सिक्के भी पड़े हैं।

एक अनुमान के मुताबिक पहाड़ी मंदिर में हर वर्ष डेढ़ से दो करोड़ रुपये भक्तों से दान स्वरूप मिलते हैं। पहाड़ी मंदिर में रखे दान पात्र को पांच मजिस्ट्रेट की टीम के सामने मंगलवार सुबह खोला गया। दान पेटी में काफी मात्रा में नोट सड़े मिले है। बताया गया है कि दान पेटी को काफी दिनों से सील कर छोड़ दिया गया था, बारिश के छींटें पड़ने से दानपेटी में रखा नोट सड़ गया है।

श्रावण महीने में प्रतिदिन हजारों की संख्या में श्रद्धालु बाबा भोलेनाथ पर जलाभिषेक के लिए पहुंचते है और अपनी श्रद्धा तथा सामर्थ्य के अनुरुप दान पेटी में नोट और सिक्के डाल रहे थे। सील बंद दान पेटी के भर जाने के बावजूद उसे काफी दिनों तक नहीं खोला गया,जिसके कारण नोट सड़ गये।

रांची उपायुक्त  के निर्देश पर 20 दानपात्र को खोला गया, जो नोट अच्छे बचे है और जो खराब हो चुके है, उनकी अलग-अलग गिनती की जा रही है। जिला प्रशासन की ओर से पांच मजिस्ट्रेट के तौर पर कांके सीआई चंचल किशोर प्रसाद, अरगोड़ा सीआई कमलाकांत वर्मा, हेहल सीआई दिलीप कुमार गुप्ता, मांडल सीआई रमेश कुमार रविदास और ओरमांझी सीआई रंजीत कुमार की उपस्थिति में दानपेटी खोला गया है।

वहीं कार्यपालक दंडाधिकारी एनी रिंकु कुजूर की उपस्थिति में नोट की गिनती की वीडियोग्राफी भी करायी जा रही है। बताया गया है कि यहां के पुजारियों को कई महीनों से वेतन नहीं मिला है, उपायुक्त से मिलकर वेतन भुगतान का आग्रह किया था।

पुजारियों का कहना है कि यदि समय रहते दान पेटी को खोल दिया जाता तो बड़ी राशि मंदिर के विकास में आ जाती, लेकिन मंदिर प्रबंधन समिति की उदासीनता की वजह से ऐसी स्थिति हो गयी। गौरतलब है कि पहाड़ी मंदिर की पहचान न सिर्फ धार्मिक महत्ता के कारण है, बल्कि इसकी ऐतिहासिक पहचान भी रही है।