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पद्मश्री ओम पुरी का 66 वर्ष की उम्र में दिल का दौरा पड़ने से निधन आज सुबह मुंबई में निधन हो गया।ओम पुरी का जन्म 18 अक्टूबर 1950 में हरियाणा के अम्बाला शहर में हुआ था।  उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा अपने ननिहाल पंजाब के पटियाला से पूरी की।

उन्हें भारत सरकार द्वारा पद्मश्री की उपाधि दी गई और उन्होंने ‘आरोहण’ और ‘अर्धसत्य’ के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार हासिल किया था| 1976 में पुणे फिल्म संस्थान से प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद ओमपुरी ने लगभग डेढ़ वर्ष तक एक स्टूडियो में अभिनय की शिक्षा दी। बाद में ओमपुरी ने अपने निजी थिएटर ग्रुप “मजमा” की स्थापना की।

शुरुआत से ही ओमपुरी का रुझान रंगमंच की ओर था। 1970 के दशक में वे पंजाब कला मंच नामक नाट्य संस्था से जुड़ गए। लगभग तीन वर्ष तक पंजाब कला मंच से जुड़े रहने के बाद उन्होंने दिल्ली में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (NSD) में दाखिला ले लिया। इसके बाद अभिनेता बनने का सपना लेकर उन्होंने पुणे फिल्म संस्थान (FTII) में दाखिला ले लिया।

1976 में पुणे फिल्म संस्थान से प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद ओमपुरी ने लगभग डेढ़ वर्ष तक एक स्टूडियो में अभिनय की शिक्षा भी दी। बाद में ओमपुरी ने अपने निजी थिएटर ग्रुप “मजमा” की स्थापना की। ओमपुरी ने अपने सिने करियर की शुरुआत विजय तेंदुलकर के मराठी नाटक पर बनी फिल्म घासीराम कोतवाल के साथ की थी। ओम पुरी ने एक बार दावा किया था कि उन्हें अपने बेहतरीन काम के लिए मूंगफली दी गई थी।

साल 1980 में प्रदर्शित फिल्म ‘आक्रोश’ ओम पुरी के सिने करियर की पहली हिट फिल्म साबित हुई। गोविन्द निहलानी निर्देशित इस फिल्म में ओम पुरी ने एक ऐसे व्यक्ति का किरदार निभाया जिस पर पत्नी की हत्या का आरोप लगाया जाता है। फिल्म में अपने दमदार अभिनय के लिये ओमपुरी सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता के फिल्म फेयर पुरस्कार से सम्मानित किए गए।

1980 के दशक में अमरीश पुरी, नसीरुद्दीन शाह, शबाना आजमी और स्मिता पाटिल के साथ ओम पुरी उन मुख्य एक्टर्स में शुमार हैं जिन्होंने उस समय की कही जाने वाली आर्ट फिल्मों में काम किया था। ओम पुरी को फिल्म आरोहण (1982) और अर्ध सत्य (1983) के लिए बेस्ट एक्टर का नेशनल अवार्ड भी मिला था।