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16999029_1368503146505858_9219064559082799916_nयूपी में पांच चरणों के चुनाव निपटने के बाद अब सभी राजनीतिक दलों ने छठे चरण के लिए अपनी ताकत झोंक दी है। इस चरण में पूर्वांचल के सात जिलों की 49 विधानसभा सीटों के लिए चुनाव होना है। सभी दल इस क्षेत्र के मतदाताओं को लुभाने में जुटे हैं|

छठे चरण की जंग वाली जमीन से सभी दलों को उम्मीदें हैं तो हर एक के सामने कुछ न कुछ चुनौतियां भी हैं। विधानसभा के पिछले चुनाव में भाजपा को इस जमीन की 49 सीटों में सिर्फ सात तो सपा को 27 सीटें मिली थीं।वर्ष 2007 में परिसीमन से पहले इस जमीन वाली सीटों में बसपा को 25 पर जीत मिली थी। भाजपा की बात करें तो उसके लिए इस जमीन पर कुछ ज्यादा चुनौती नजर आती है, क्योंकि कई इलाके तो ऐसे हैं जिन पर पिछले चुनाव में ही नहीं उसके पहले हुए छह चुनावों में भी उसका खाता नहीं खुल सका है।हालांकि कुछ सीटें ऐसी भी हैं जिन पर भाजपा को बीते सात चुनाव में तीन से छह बार तक सफलता मिल चुकी है।

दलों ने अपने-अपने बड़े नेताओं व रणनीतिकारों को गोरखपुर में कैंप करवा दिया है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव गुलाम नबी आजाद, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राज बब्बर, बसपा प्रमुख मायावती सहित सभी पार्टियों के दिग्गज इन क्षेत्रों में आखिरी जोर-आजमाइश में लग गए हैं।

छठे चरण में महराजगंज, कुशीनगर, गोरखपुर, देवरिया, आजमगढ़, मऊ एवं बलिया जिले की 49 सीटों के लिए मतदान चार मार्च को होगा। यहां चुनाव प्रचार दो मार्च की शाम पांच बजे समाप्त हो जाएगा।