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पटना 
चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने तमाम अनुमानों और अटकलों पर विराम लगाते हुए रविवार को जेडीयू कार्यकारिणी की बैठक से पहले मुख्यमंत्री और जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार के समक्ष पार्टी की सदस्यता ली और अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत कर दी। जानकारी के मुताबिक आने वाले दिनों में प्रशांत किशोर को बिहार में पार्टी और सरकार में बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है। बीजेपी के साथ सीट बंटवारे को लेकर प्रशान्त ने कहा कि एक सप्ताह से दस दिन के अंदर सीटों का फैसला हो जाएगा।

इधर बीजेपी के सीनियर नेता और बिहार के डिप्टी सीएम सुशील मोदी ने प्रशांत किशोर के जेडीयू में शामिल होने के बाद बड़ी बात कही है। सुशील मोदी ने कहा कि प्रशांत किशोर के जेडीयू में शामिल होने से बिहार की सभी 40 संसदीय सीटें जीतने के अभियान को नई ताकत मिलेगी।

सुशील मोदी ने ट्वीट किया, ”चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर के विधिवत एनडीए के प्रमुख सहयोगी जदयू में शामिल होने से बिहार की सभी 40 संसदीय सीटें जीतने के अभियान को नई ताकत मिलेगी”

वहीं प्रशांत किशोर मूल रूप से रोहतास जिले के रहने वाले हैं और उनके माता-पिता सहित परिवार के लोग बक्सर में ही रहते हैं। उनका बक्सर में ही मकान भी है। ब्राह्मण जाति से आने वाले पीके की बक्सर सीट से दावेदारी इसलिये भी जानी जा रही है क्योंकि वहां के वर्तमान बीजेपी सांसद अश्विनी चौबे ने इस सीट को पहले ही छोड़ने के संकेत दे दिये हैं ऐसे में ये सीट जेडीयू के खाते में जाना तय है। बक्सर सीट से जेडीयू पीके को पार्टी सबसे योग्य चेहरा मान रही है ऐसे में अगर उन्हें इस सीट से मौका मिलता है तो इसमें कुछ अचरज वाली बात नहीं होगी।

सवर्ण वोटर बाहुल्य बक्सर लोकसभा सीट में ब्राह्मण वोटरों की भी अच्छी संख्या है शायद यही कारण रहा है कि इस सीट से लोकसभा और विधानसभा के चुनाव में लोगों ने अधिकांशत: किसी सवर्ण या ब्राह्मण उम्मीदवार को जिताया है। अश्विनी चौबे बाहरी होने के बावजूद इस सीट से सांसद बने तो वहां के स्थानीय विधायक मुन्ना तिवारी भी ब्राह्मण हैं ऐसे में पीके के साथ ये फैक्टर भी सरप्लस है।

2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव को लेकर सभी दलों में सीटों के बंटवारे को लेकर चर्चा अंतिम दौर में है ऐसे में लोगों की नजर बक्सर सीट पर भी होगी कि अब देखने आगे देखने वाली बात होगी कि क्या वहां से नीतीश कुमार और जेडीयू का भरोसा जीतने में प्रशांत किशोर कामयाब होंगे, या फिर से ये सीट किसी बाहरी उम्मीदवार के खाते में जाती है।