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डेटा लीक का विवाद ख़त्म होने के बजाये बढ़ता ही जा रहा है। इस मामले में अभी तक मार्क जकरबर्ग तक लपेटे में आ चुके हैं। हर भाजपा कांग्रेस के बीच जो बयानबाजी का दौर चल रहा है उसके कहने ही क्या।
हलके फुल्के बयानों से शुरु हुई बहस अब राहुल गांधी और नरेंद्र मोदी के बीच बड़े बयानों में तब्दील हो चुकी है।

गौरतलब है कि कांग्रेस और बीजेपी के बीच डेटा शेयर करने के मुद्दे पर जारी घमासान के बीच राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को ‘बिग बॉस’ करार दिया जो भारतीयों की जासूसी करवाना चाहते हैं।

इस बाबत भाजपा भी भला कहां चुप रहने वाली है। लिहाजा बीजेपी ने भी विपक्षी दल पर ‘डेटा चोरी’ का आरोप लगाया।

प्रधानमंत्री के आधिकारिक ऐप से यूजर्स की सहमति के बिना डेटा शेयर करने का आरोप सामने आने के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्विटर पर कहा कि नमो ऐप ने गोपनीय ढंग से ऑडियो, विडियो, कॉन्टैक्ट लिस्ट और जीपीएस के जरिए यूजर का पता-ठिकाना तक जान लिया।

उन्होंने कहा, ‘मोदी का नमो ऐप गोपनीय रूप से ऑडियो, वीडियो तथा आपके मित्रों एवं परिवार के सम्पर्क रिकॉर्ड कर रहा है और जीपीएस के जरिए आपके पते-ठिकाने को जान रहा है। वह बिग बॉस है, जो भारतीयों की जासूसी करना चाहता है।’

राहुल ने ‘डिलीट नमो ऐप’ हैशटैग के साथ किए ट्वीट में कहा, ‘अब वह हमारे बच्चों के बारे में डाटा चाहते हैं। 13 लाख एनसीसी कैडेट्स को ऐप डाउनलोड करने के लिए मजबूर किया गया।’

वे यहीं पर नहीं रुके और उन्होंने एक अन्य ट्वीट में कहा, ‘मोदी लाखों भारतीयों के डाटा के साथ प्रधानमंत्री पद का दुरूपयोग सरकार द्वारा प्रोत्साहित नमो ऐप के जरिए अपना व्यक्तिगत डाटाबेस बनाने के लिए कर रहे हैं।’
उनका कहना है , ‘‘यदि प्रधानमंत्री भारत के साथ प्रौद्योगिकी के जरिए संवाद करना चाहते हैं तो कोई समस्या नहीं है। किंतु क्या इसके लिए आधिकारिक पीएमओ एप का इस्तेमाल किया जाएगा। डेटा का सम्बन्ध भारत से है, मोदी से नहीं।’

राहुल के ट्वीट पर केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने भी माइक्रो ब्लॉगिंग साइट का सहारा लेते हुए पलटवार किया। स्मृति ने ट्वीट किया, ‘ये क्या राहुल गांधी जी, लगता है कि आप जो कहते हैं, उसके विपरीत आपकी टीम काम करती है। नमो एप को डिलीट करने के बजाए उन्होंने कांग्रेस एप को डिलीट कर दिया है।’

स्मृति ने कहा, ‘अब जब हम प्रौद्योगिकी की बात कर रहे हैं तो क्या आप जवाब देंगे राहुल गांधी जी कि कांग्रेस डेटा सिंगापुर के सर्वरों में क्यों भेजती है, जिसे कोई भी टॉम, डिक या एनालिटिका हासिल कर सकता है।’

वहीं, डेटा लीक के आरोपों पर बीजेपी नेता और राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यन स्वामी ने कहा, ‘बीजेपी के आईटी सेल प्रमुख को इस पर प्रतिक्रिया देनी ही चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस पर संज्ञान लेना चाहिए और आधारहीन आरोपों पर तथ्यों के साथ जवाब देना चाहिए। बीजेपी आईटी सेल फिलहाल सिर्फ पलटवार कर रहे हैं। इससे कौन सा उद्देश्य सिद्ध होगा?’

बहरहाल जब बात निकली है तो दूर तलक जायेगी। अच्छा तो यही होगा कि इस बाबत बयानबाजी करने के बजाय कोई ठोस जांच हो और मामला अपने अंजाम तक पहुंचे।