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गुजरात विधानसभा चुनाव इस बार पूरे देश के लिए इसलिए भी दिलचस्पी का विषय हैं क्योंकि इस दफा नरेन्द्र मोदी के गढ़ में उन्हें टक्कर देने के लिए कई लोग कमर कस चुके हैं। जिसमें सबसे आगे हैं पाटीदार अमानत संघर्ष समिति (पास) नेता हार्दिक पटेल। हार्दिक को लेकर बीजेपी इतनी सहमी है कि कभी सेक्स सीडी का सहारा लेकर उनकी इमेज खराब करने की कोशिश करती है तो कभी मोदी को बार बार गुजरात के चक्कर लगवाकर माहौल को अपने पक्ष में रखने को हतोत्साहित नजर आती है।

अभी हाल में हार्दिक ने राहुल गांधी से हाथ मिलाकर भाजपा के लिए और भी मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। काँग्रेस से हुई यह दोस्ती जाहिर है हार्दिक को मजबूती देगी और उनका भाजपा के खिलाफ जनाधार मजबूत होगा। इस तरह से लगता है राहुल गांधी और हार्दिक पटेल मिलकर इस बार गुजरात में भाजपा को घर में न सिर्फ तगड़ी चुनौती देने के मूड में दिख रहे हैं बल्कि कयास तो यह भी लगाये जा रहे हैं कि यही हाल रहा तो दोनों मिलकर भाजपा का शिकार कर डालेंगे, यानी चुनाव में पटखनी देंगे। हालांकि अभी किसी नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होगी लेकिन इस बात स एंकार नहीं किया जा सकता है कि हार्दिक और राहुल का यह गठबंधन भाजपा के लिए सिरदर्द बना हुआ है। बुधवार को मीडिया से बातचीत करते हुए हार्दिक ने कहा भी है कि उनकी आरक्षण को मांगों को कांग्रेस ने मान लिया है। सत्‍ता में आते ही आरक्षण पर कांग्रेस प्रस्‍ताव लाएगी। इसके साथ ही कहा कि कुछ वर्गों को जरूरत से ज्‍यादा आरक्षण दिया गया है। ऐसे में सर्वे करने के बाद जिन लोगों को आरक्षण की जरूरत है, केवल उनको ही ये मिले। हमारी मांगें गुजरात के हित में हैं। पाटीदार समाज को शिक्षा, रोजगार चाहिए। पाटीदारों को प्रावधानों के मुता‍बिक तय 50 प्रतिशत से ज्‍यादा आरक्षण दिया जा सकता है। कांग्रेस से कोई रिश्‍तेदारी नहीं लेकिन उसने आरक्षण पर हमारी मांगें मानीं। कांग्रेस से हमने टिकट नहीं मांगा है, हमें आरक्षण चाहिए। इसके साथ ही बीजेपी पर आरोप लगाते हुए कहा कि वह हमारे उम्‍मीदवारों को खरीदने की कोशिश कर रही है। उसने 200 करोड़ रुपये खर्चकर निर्दलीय उम्‍मीदवारों को मैदान में उतारा है। हमारी बीजेपी के खिलाफ कोई लड़ाई नहीं है लेकिन उसके खिलाफ लड़ाई लड़नी जरूरी है। पास में फूट के बारे में बोलते हुए कहा कि उनके संगठन में कोई विवाद जैसी बात नहीं है।

कांग्रेस के एजेंट बनने के आरोपों पर बोलते हुए हार्दिक पटेल ने कहा कि मैं गुजरात का एजेंट हूं। मैं न कांग्रेस में हूं और ना ही अगले ढाई साल तक किसी पार्टी में जाने वाला हूं। हालांकि हार्दिक पटेल ने ग्रेस को खुले तौर पर समर्थन की बात नहीं की लेकिन बीजेपी के खिलाफ मुखर लड़ाई की बात कही

इसी से पता चल जाता है कि भाजपा की मुश्किलें कितनी ज्यादा बढ़ने वाली हैं। हालाँकि इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता है कि पिछले कुछ विवादों से हार्दिक की छवि खराब हुई है।
हार्दिक पटेल को सबसे बड़ा झटका उस समय लगा जब दिनेश बंभानिया ने उनकी रणनीति पर सवाल उठाया और टिकटों के बंटवारे पर कांग्रेस का विरोध किया। चिराग और केतन पटेल हार्दिक के सबसे करीबी थे, लेकिन वही सबसे पहले साथ छोड़कर चले गए। उन्होंने आरोप लगाया कि हार्दिक अभी फैसले लेने के लिए परिपक्व नहीं हुए हैं। वरुण और रेशमा ने भी कुछ इसी तरह के आरोप लगाए।

 

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