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राष्ट्रगान मामले की सुनवाई के दौरानब सुप्रीम कोर्ट ने हाल में ही कहा है कि देशभक्ति साबित करने को सिनेमा हॉल में राष्ट्रगान के दौरान खड़े होने की जरूरत नहीं है। अदालत ने केंद्र सरकार से कहा कि वह सिनेमाघरों में राष्ट्रगान बजाने को नियंत्रित करने के लिए नियमों में संशोधन पर विचार करे।
इसके बावजूद सरकारें राष्ट्रगान को लेकर अजीबोगरीब फैसले देने से बाज नहीं आ रही हैं। अब खबर है कि राजस्थान सरकार ने अब स्कूल के स्टूडेंट्स में देशभक्ति की भावना को ‘जगाने’ के लिए हॉस्टलों में राष्ट्रगान + को अनिवार्य कर दिया है। राजस्थान के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग ने ओबीसी, एससी तथा एसटी के सभी 789 हॉस्टलों को राष्ट्रगान गाने का निर्देश जारी किया है। निर्देश के अनुसार सभी हॉस्टलों में सुबह 7 बजे राष्ट्रगान अनिवार्य होगा। सरकार के द्वारा सोमवार को जारी एक बयान के अनुसार सभी आवासीय स्कूलों में राष्ट्रगान + अनिवार्य होगा। यह परंपरा हॉस्टलों में भी फॉलो की जाएगी। विभाग द्वारा जारी यह निर्देश रविवार से ही प्रभावी हो गया है। विभाग के प्रमुख सचिव समित शर्मा ने बताया कि राष्ट्रगान गाने की यह परंपरा हॉस्टलों की दिनचर्या में पहले से शामिल है। उन्होंने कहा, ‘हॉस्टलों में रहने वाले बच्चे हर सुबह प्रार्थना के लिए तो एकत्र होते हैं। स्टाफ की कमी की वजह से राष्ट्रगान गाने के निर्देश का पालन नहीं हो पा रहा था। यह निर्देश इसलिए जारी किया गया है कि राष्ट्रगान को नियमित तौर पर गाया जाए।’ विभाग के अंतर्गत में करीब 800 हॉस्टल हैं, जिनमें 40 हजार स्टूडेंट्स पढ़ते हैं। इससे पहले जयपुर के मेयर अशोक लाहोटी ने भी सुबह राष्ट्रगान और शाम को वंदेमातरम गाना अनिवार्य कर दिया था। इसके बाद राजस्थान यूथ बोर्ड ने 8 नवंबर को सवाई मान सिंह स्टेडियम में ‘वंदे मातरम’ कार्यक्रम का आयोजन किया था। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे भी इस कार्यक्रम में शामिल हुईं थीं।