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आश्चर्य की बात है कि हमारे इतने महान देश की संस्कृति किसी न किस फिल्म के रिलीज होने से खतरे में पद जाती है। कभी संस्कार आहात हो जाते हैं तो कभी एतिहासिक किरदारों से गरिमा। बेचारे संजय लीला भंसाली इस बार कट्टरपंथी विचारधारा के लोगों के निशाने पर ऐसे आये हैं कि उनकी हालिया फिल्म पद्मावती की रिलीज डेट टालनी पड़ी। पहले उनके सेट पर लगभग उनकी पिटाई हो गयी। फिर फिल्म सेट तोड़ दिया गया। जी तैसे फिल्म कम्प्लीट हुई तो विरोध प्रदर्शन होने लगे। उनकी फिल्म पद्मावती की रिलीज पर रोक लगाने के लिए संगठनों के अलावा राजनेता भी बिगुल बजा चुके हैं। तमाम विवादों को खत्म करने के लिए संजय लीला भंसाली ने एक वीडियो भी जारी किया।
इस वीडियो में खुद संजय लीला भंसाली ने दावा किया है कि उनकी फिल्म में रानी पद्मावती और अलाउद्दीन खिलजी के बीच कोई स्वप्न दृष्य नहीं है। ‘‘पद्मावती’’के विरोध में राजस्थान के सभी पूर्व राज घराने भी एक साथ आ गए हैं। जयपुर के सिटीपैलेस में पूर्व राज परिवार की पद्मिनी देवी और भाजपा विधायक दिया कुमारी ने पत्रकारों से बात करते हुए साफ कर दिया कि वह इतिहास से छेड़छाड़ करने वाली फिल्म ‘‘पद्मावती’’को राजस्थान में प्रदर्शित नहीं होने देंगी। उधर राजस्थान के सबसे बड़े फिल्म वितरक राज बंसल ने फिल्म के वितरण अधिकार खरीदने से साफ मना कर दिया है। पहले खबर थी कि फिल्म पद्मावती को लेकर लगातर बढ़ रहे विवादों के बीच फिल्म के निर्माता कंपनी वायकॉम18 ने इसकी रिलीज को टाल दिया है। न्यूज एजेंसी पीटीआई के हवाले से खबर है कि निर्माता कंपनी ने खुद रिलीज को टालने का फैसला किया है। इसके पहले सेंसर बोर्ड ने भी कुछ तकनीकी कारणों से फिल्म को लौटा दिया था। साथ ही इस बात पर नाराजगी जाहिर की थी कि फिल्म के निर्देशक संजय लीला भंसाली ने सेंसर बोर्ड से फिल्म के पास हुए बगैर ही कुछ चुनिंदा पत्रकारों को फिल्म दिखा दी है।
अब खबर आई है कि फिल्म पद्मावती के सर्टिफिकेशन की प्रक्रिया में तेजी लाने की फिल्म निर्माताओं की मांग को सेंसर बोर्ड ने खारिज कर दिया है। केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड का कहना है कि पद्मावती की तय नियमों और आवेदनों की क्रम संख्या के मुताबिक ही समीक्षा की जाएगी। रानी पद्मिनी पर आधारित संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावती इन दिनों विवादों में घिरी हुई है। राजपूत करणी सेना समेत कई राजनीतिक दलों से जुड़े नेता फिल्म में पद्मिनी के कथित आपत्तिनजक चित्रण में बदलाव की मांग कर रहे हैं।
इस बीच सेंसर बोर्ड ने पेपरवर्क अधूरा होने की बात कहते हुए फिल्म को वापस निर्माताओं को लौटा दिया है। ऐसे में सेंसर बोर्ड से फिल्म को मंजूरी मिलने में भी देरी हो रही है।