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यूपी और बिहार के उपचुनावी नतीजों ने साबित कर दिया है कि जनता का भाजपा से पूरी तरह से मोहभंग हो गया है। बिहार उपचुनाव नतीजे की तुलना में 13 फीसदी घटा भाजपा का वोट, वहीँ उत्तर प्रदेश में मायावती और अखिलेश यादव के नए गठजोड़ ने सीएम योगी तक को चिंतित कर दिया है।

भाजपा के इस नए हार के गणित ने काफी दूरगामी संकेत दे दिए हैं। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश की गोरखपुर व फूलपुर तथा बिहार की अररिया लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव के नतीजे को घोषित कर दिए गए हैं।  इतना ही नहीं इसके अलावा बिहार के भभुआ व जहानाबाद विधानसभा में भी उपचुनाव के परिणामों का ऐलान भी कर दिया गया है।

इन नतीजों में सबसे दिलचस्प बात यही रही कि उत्तर प्रदेश और बिहार में भारतीय जनता पार्टी को तगड़ा झटका लगा है।

गौरतलब है कि ये नतीजे भाजपा के लिए बुरे सपने से कम नहीं हैं। तीनों लोकसभा सीटों पर हार गई है। गोरखपुर व फूलपुर में समाजवादी पार्टी ने शानदार जीत हासिल करते हुए बीजेपी को शिकस्त दी है। वहीं अररिया में राष्ट्रीय जनता दल के उम्मीदवार ने कामयाबी पाई है।

भभुआ विधानसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की रिंकी पांडे ने कांग्रेस के शंभु पटेल को हरा दिया। जबकि जहानाबाद में राजद उम्मीदवार सुदय यादव ने जनता दल-युनाइटेड (जद-यू) के अभिराम शर्मा को 35,036 वोट से हरा दिया।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने लोकसभा उप चुनाव में भाजपा पर बड़ी बढ़त बनाने पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव, बसपा प्रमुख मायावती और राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव को बधाई दी।

तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ने ट्वीट किया, “महान जीत। मायावती और अखिलेश जी को बधाई. अंत की शुरुआत हो चुकी है।” उन्होंने कहा, “अररिया और जहानाबाद जीतने पर लालू जी को बधाई। यह महान जीत है।”
गोरखपुर सीट उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और फूलपूर सीट उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के सासंद पद से इस्तीफा देने के बाद खाली हुई थी।

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने अपनी कट्टर प्रतिद्वंद्वी समाजवादी पार्टी को उपचुनाव में समर्थन का ऐलान किया था। सपा और बसपा का जनाधार भाजपा पर भारी पड़ता दिख रहा है।

ये चुनाव यह संकेत दे रहे हैं कि भाजपा दोनों ही लोकसभा क्षेत्रों में हार की तरफ बढ़ती हुई दिखाई दे रही है।

आपको याद होगा कि भाजपा ने 2014 में राज्य की 80 लोकसभा सीटों में से 73 पर जीत हासिल की थी। उसके सहयोगियों ने भी दो सीटों पर जीत दर्ज की थी। सपा ने पांच सीटें अपने नाम की थी जबकि कांग्रेस और बसपा अपना खाता खोलने में नाकाम रही थीं।

अब देखना होगा कि मोदी लहर पर सवार होने का दावा करती भाजपा का अगले चुनावों में क्या भविष्य होगा।