A police officer stands guard in front of the Reserve Bank of India (RBI) head office in Mumbai April 17, 2012. The Reserve Bank of India cut interest rates on Tuesday for the first time in three years by an unexpectedly sharp 50 basis points to give a boost to flagging economic growth but warned that there is limited scope for further rate cuts. REUTERS/Vivek Prakash (INDIA - Tags: BUSINESS)
Print Friendly, PDF & Email

A police officer stands guard in front of the Reserve Bank of India (RBI) head office in Mumbai April 17, 2012. The Reserve Bank of India cut interest rates on Tuesday for the first time in three years by an unexpectedly sharp 50 basis points to give a boost to flagging economic growth but warned that there is limited scope for further rate cuts. REUTERS/Vivek Prakash (INDIA - Tags: BUSINESS)

रिजर्व बैंक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 500 और 1000 रुपये के नोटों को बंद करने के फैसले की डिटेल साझा करने से मना कर दिया। बैंक की ओर से कहा गया है कि “इससे जान और राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा हो सकता है।” ब्लूमबर्ग न्यूज़ ने आरटीआई के ज़रिये आठ दिसंबर से दो जनवरी के बीच आरबीआई से 14 सवाल किए थे| 11 जनवरी तक इनमें से पांच के जवाब दिए गए। इसमें बैंक की बोर्ड मीटिंग के समय और तारीख की जानकारी के साथ ही कहा गया कि “बोर्ड ने आठ नवंबर से पहले नोटबंदी पर चर्चा नहीं की।” बैंक की ओर से कहा गया कि “बैंकों में बिना मूल्य के कितने नोट जमा हुए इसकी उसके पास जानकारी नहीं है।” साथ ही नए नोटों को छापने को लेकर पूछे गए दो सवाल प्रिंटिंग प्रेस संभालने वाले संगठनों को भेज दिए गए।

आरबीआई की ओर से कहा गया कि “बोर्ड ने किस आधार पर नोटबंदी पर चर्चा की और इस पर मुहर लगाई यह सवाल आरटीआई एक्ट की जानकारी की परिभाषा के तहत नहीं आता। ब्लूमबर्ग ने आगे बताया कि नोटबंदी का विरोध करने वाले बोर्ड सदयों को लेकर तीन बार पूछे गए एक सवाल पर अलग-अलग जवाब दिए गए। दो जवाबों में कहा गया कि “निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया।” एक अन्य जवाब में बताया गया कि “यह जानकारी रिकॉर्ड में मौजूद नहीं है।”

 प्रधानमंत्री मोदी के नोटबंदी के एलान के वक़्त बैंकों में कितने पुराने नोट थे| इस सवाल आरबीआई ने इस जानकारी को सार्वजनिक करने वाले की जान को खतरा बताया। रिजर्व बैंक ने दो अन्य सवालों को भी टाले जाने की बात कही। बैंक ने नोटबंदी की तैयारियों और इससे पड़ने वाले असर की भविष्यवाणी को लेकर भी जवाब नहीं दिया। इस पर कहा गया कि“जवाब से भारत की स्वायत्तता, अखंडता और सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी।” आरबीआई के जवाबों पर केंद्रीय सूचना आयोग में नौकरशाह रहे शैलेश गांधी ने बताया कि “आरटीआई के तहत सवालों के जवाब ना देकर आरबीआई नागरिकों के मूलभूत अधिकारों का हनन कर रही है।”